उड़ानों पर ब्रेक के बाद धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा ऑपरेशन, तीसरे हमले ने बढ़ाई चिंता


दुनिया के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में शामिल दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले के बाद सोमवार को उड़ान सेवाएं धीरे-धीरे बहाल होने लगीं. अधिकारियों ने बताया कि हमले से पैदा हुए खतरे के कारण कुछ समय के लिए उड़ानों को रोकना पड़ा, जिससे ग्लोबल एविएशन ट्रैफिक पर असर पड़ा.

यह घटना ऐसे समय हुई है, जब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध ने मिडिल ईस्ट के हवाई क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है. मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे के चलते कई देशों ने अपने एयरस्पेस को सीमित या बंद कर रखा है, जिससे फ्लाइट्स रद्द, डायवर्ट या रि-शेड्यूल करनी पड़ रही हैं. इसके साथ ही ईंधन की बढ़ती कीमतों ने एयरलाइंस की लागत और दबाव दोनों बढ़ा दिए हैं.

धीरे-धीरे बहाल हो रही सेवाएं
दुबई सिविल एविएशन अथॉरिटी ने बताया कि चुनिंदा जगहों के लिए उड़ानों का ग्रैजुअल रिज़्यूम्शन शुरू किया गया है. दुबई मीडिया ऑफिस के अनुसार सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के बाद चरणबद्ध तरीके से सेवाएं सामान्य की जा रही हैं. एमिरेट्स एयरलाइन ने कहा कि हमले के बाद सुबह 06:00 GMT से आंशिक रूप से ऑपरेशन फिर शुरू करने की योजना बनाई गई. एयरलाइन के मुताबिक एयरपोर्ट के पास एक फ्यूल टैंक प्रभावित हुआ, हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है.

एमिरेट्स ने अपनी वेबसाइट पर जानकारी दी कि कुछ उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जबकि उसकी सहयोगी एयरलाइन फ्लाई दुबई ने भी अस्थायी रूप से उड़ानें रोक दी थीं. कई फ्लाइट्स को अल मकतूम इंटरनेशनल एयरपोर्ट की ओर डायवर्ट किया गया.

तीसरा हमला, बढ़ती चिंता
28 फरवरी से खाड़ी देशों पर ईरान द्वारा किए गए हमलों के बाद से यह दुबई एयरपोर्ट पर तीसरी घटना है. ईरान का कहना है कि उसके हमलों का उद्देश्य क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को निशाना बनाना है. हालांकि इन हमलों में नागरिक सुविधाएं जैसे एयरपोर्ट, होटल और बंदरगाह भी प्रभावित हुए हैं. संयुक्त अरब अमीरात समेत कई खाड़ी देश अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मेजबानी करते हैं. इसके बावजूद इन हमलों से नागरिक विमानन और बुनियादी ढांचे को गंभीर खतरा पैदा हुआ है.

ग्लोबल एयर ट्रैफिक पर असर
युद्ध के चलते मिडिल ईस्ट में एयरस्पेस बंद होने से दुनिया भर की एयरलाइंस को नए रूट तलाशने पड़ रहे हैं. इससे न केवल उड़ानों का समय बढ़ रहा है, बल्कि ईंधन लागत और टिकट कीमतों पर भी असर पड़ रहा है. खाड़ी क्षेत्र में 28 फरवरी के बाद से 2,000 से अधिक मिसाइल और ड्रोन हमले दर्ज किए गए हैं, जिनमें अमेरिकी दूतावास, सैन्य ठिकाने, तेल बुनियादी ढांचा और आवासीय क्षेत्र भी निशाने पर रहे हैं.

सामान्य स्थिति बहाल करने की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि दुबई एयरपोर्ट पर हालिया हमला दिखाता है कि क्षेत्रीय तनाव के बीच एयरलाइंस के लिए ऑपरेशन को सामान्य स्तर पर लाना आसान नहीं होगा. सुरक्षा जोखिम और बढ़ती लागत के कारण विमानन उद्योग पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ने की आशंका है. ड्रोन हमले के बाद दुबई एयरपोर्ट पर उड़ानों की बहाली भले ही शुरू हो गई हो, लेकिन मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने वैश्विक विमानन के सामने सुरक्षा और लागत दोनों की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है.

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