मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच उत्तरी इजरायल में हिज़्बुल्लाह पर करीब 100 रॉकेट दागे हैं, जबकि इज़रायली सेना दक्षिणी लेबनान में आगे बढ़ते हुए कार्रवाई कर रही है. हिज़्बुल्लाह और इजरायली सेना के बीच गुरुवार (26 मार्च 2026) समेत शुक्रवार (27 मार्च 2026) को हमले होते रहे. सीमा के पास और उत्तरी इजरायल के कई शहरों में सायरन बज रहे हैं, जिससे लोगों में डर का माहौल बना हुआ है. अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार शाम तक दक्षिणी लेबनान से उत्तरी इजरायल की तरफ 100 रॉकेट दागे गए. इसके अलावा लेबनान के अंदर भी कई रॉकेट दागे गए, जहां इज़रायली सैनिक आगे बढ़ रहे थे और हिज़्बुल्लाह के लड़ाकों से भिड़ंत हो रही थी.
इस दौरान इजरायल की सेना को भी नुकसान हुआ है. एक टैंक पर एंटी-टैंक मिसाइल से हमला किया गया, जिसमें एक इजरायली सैनिक की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए. रॉकेट हमलों में उत्तरी इजरायल के नहरिया शहर को भी निशाना बनाया गया. इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 14 अन्य लोग घायल हो गए. पूरे इलाके में हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं और दोनों तरफ से लगातार हमले जारी हैं.
It’s 1:30 AM, and Hezbollah just fired rockets from Lebanon towards Tel Aviv and other cities in Central Israel, aiming to kill innocent families as they sleep.
Hezbollah must be destroyed.
— Vivid.🇮🇱 (@VividProwess) March 25, 2026
ईरान युद्ध की शुरुआत कब हुई थी?
अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के कई ठिकानों पर हमला किया था. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडरअयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई नेताओं की मौत हो गई थी. इस घटना के बाद दोनों पक्षों के बीच युद्ध शुरू हो गया, जो अब चौथे हफ्ते में पहुंच चुका है. इस दौरान ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इज़रायल के साथ-साथ कई खाड़ी देशों पर भी हमला किया और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. मिडिल ईस्ट में चल रहे इस युद्ध का असर अब दुनिया के कई देशों पर दिखने लगा है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि तेल और गैस से जुड़े ठिकानों पर लगातार हमले हो रहे हैं, जिससे सप्लाई प्रभावित हो रही है. इसके कारण कई देशों में तेल और गैस की उपलब्धता पर असर पड़ रहा है. इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से ट्रांसपोर्ट पर भी बड़ा असर पड़ा है. यह एक बहुत अहम समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस गुजरता है. इसके प्रभावित होने से पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है.
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