मिडिल ईस्ट में चल रही जंग ने एक तरफ जहां तेल सप्लाई दुनिया भर में ठप सी पड़ गई है तो वहीं अन्य देशों को इन प्राकृतिक ईंधन की कमी से जूझना पड़ रहा है. ऐसे में वहां की सरकारें सख्त कदम उठा रही हैं. वहीं, पेट्रोल और डीजल की कमी के चलते अब जमाखोर इसका फायदा उठा रहे हैं. ईंधन की जमाखोरी के आरोप में श्रीलंका में एक व्यक्ति को 21 दिन की जेल की सजा सुनाई गई है.
चार लीटर पेट्रोल की जमाखोरी के मामले में जेल
पूरा मामला उत्तर पश्चिमी श्रीलंका का है. यहां एक शहर में चार लीटर पेट्रोल की जमाखोरी के आरोप में व्यक्ति को 21 दिन की सजा सुनाई गई है. अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के बाद श्रीलंका ने ईंधन की जमाखोरी पर तुरंत प्रतिबंध लगा दिया था. इसी सिलसिले में कार्रवाई करते हुए उत्तर पश्चिमी प्रांत के निकवेरतिया शहर के रहने वाले 48 साल के लसंथा कुमारा बालसूरिया ने गुरुवार को अदालत की सुनवाई के दौरान अपना जुर्म कबूल लिया.
अदालत से क्या बोला आरोपी?
लसंथा ने अदालत को बताया कि उसने जो ईंधन जमा किया था, उसका इस्तेमाल वह अपने दिवंगत माता पिता की सालाना धार्मिक रस्म के लिए आसपास की सफाई करने में करने वाला था. आरोपी का नाम बालसूरिया है. उसे जज ने चार लीटर पेट्रोल की जमाखोरी के लिए 21 दिन की सजा सुनाई. उसपर 1500 श्रीलंकाई रुपए का अतिरिक्त जुर्माना लगाया गया.
ईंधन को लेकर सख्त श्रीलंका की सरकार
श्रीलंका सरकार ने 15 मार्च को ईंधन की QR कोड आधारित राशनिंग व्यवस्था शुरू की थी. ऊर्जा मंत्रालय की मानें तो इस व्यवस्था तहत कारों को हर हफ्ते 15 लीटर, बसों को हर हफ्ते 60 लीटर लेने की अनुमति है.
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ईरान पर संयुक्त कार्रवाई की थी. इसके बाद तनाव और बढ़ गया, जंग ने भयानक रूप ले लिया. इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर समेत कई बड़े नेता मारे गए. ईरान के जवाबी हमले के बाद से यह युद्ध पूरे खाड़ी इलाके में फैल गया है. इस युद्ध के वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का ट्रैफिक प्रभावित हुआ है. यह कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए बेहद ही महत्वपूर्ण है.
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