अमेरिका ईरान जंग के 32वें दिन भी दुनिया इस दुविधा में पड़ी हुई है कि मिडिल ईस्ट संकट का अंत कब और कैसे होगा. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बार-बार ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खोलने पर धमकी दे रहे हैं. ट्रंप इतने कंफ्यूज नजर आ रहे हैं कि वह बार-बार होर्मुज स्ट्रेट खोलने की डेडलाइन बढ़ा रहे हैं, जिससे साफ होता है कि अमेरिका मिडिल ईस्ट में फंस चुका है.
20 सालों में ईरान ने एडवांस किया अपना हथियार
आईआईएमसी प्रोफेसर शिवाजी सरकार के मुताबिक अमेरिका ने अच्छे से ईरान का आकलन नहीं किया. पिछले साल जून में जो ईरान के साथ 12 दिनों की लड़ाई हुई थी, उसके बाद भी अमेरिका को समझ नहीं आया कि ईरान फिर से कैसे खड़ा हो गया. पिछले 20 सालों में ईरान ने अपनी टेक्नोलॉजी और हथियारों पर जबरदस्त काम किया. उन्होंने ड्रोन को अपनाया और मिसाइलों को एडवांस बनाने पर काम किया. दूसरा ये है कि ईरान के कई ऐसे दोस्त हैं, जिसे अमेरिका पसंद नहीं करता है. अपने दोस्तों की मदद से ईरान से अब अपना अच्छा साम्राज्य बना लिया.
अमेरिका के लिए उल्टा पड़ गया ट्रंप का दांव
ईरान ने एक और काम ये किया कि उसने सिर्फ एक सेंट्रल कमान नहीं बनाया, बल्कि अलग-अलग कमान बनाए हैं, जिसमें सबके काम फिक्स हैं. इसमें अगर ईरान का एक कमान खत्म भी होता है तो दूसरा उसको संभाल लेता है. अमेरिका को लगा कि सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को बार देंगे या फिर उसके सैन्य अधिकारी को मार देंगे तो काम हो जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. अमेरिका साथी इस युद्ध में उसके साथ शामिल नहीं हुए, जो उसके लिए बैकफायद साबित हुआ.
ईरान ने इस जंग का एरिया बढ़ा दिया. अमेरिका ने सोचा इजरायल से मिसाइल हमले हो रहे हैं तो ईरान उसी को टारगेट करेगा, लेकिन तेहरान ने युद्ध को दायरा बढ़ाकर इसमें खाड़ी देशों को लपेट लिया. ईरान ने रणनीति बनाकर खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. इन क्षेत्रों में जितने भी अमेरिकन इनवेस्टमेंट थे उन सबको टारगेट किया गया. यहीं कारण है कि अब दुबई एयरपोर्ट भी ठीक से काम नहीं कर पा रहा है.
अमेरिका में हो रहा ट्रंप का विरोध
अमेरिका ने कभी नहीं सोचा था कि ये युद्ध उसके लिए मल्टी डायमेंशनल होगा. यही कारण है कि अमेरिका को खुद समझ नहीं आ रहा कि अब क्या करे. यूएस में खुद इस जंग को लेकर डोनाल्ड ट्रंप का विरोध हो रहा है. सिर्फ ट्रंप प्रशासन ही नहीं पूरा अमेरिका अभी इस परेशानी में है कि इसका काउंटर कैसे करें. इस समय ईरान की स्ट्रैटजिक पॉलिसी ने अमेरिका की नींद उड़ा रखी है. ट्रंप की हताशा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जंग से पहले एक हफ्ते तक ईरान को तबाह करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति अब शांति प्रस्ताव की बात कह रहे हैं.