Explained: क्या 2026 में सूख जाएंगे पेट्रोल पंप? क्यों कहा जा रहा 1973 जैसा तेल संकट लौट आया! जानें तब-अब में 5 बड़े फर्क


फरवरी 1974… न्यूयॉर्क के पास छोटे से कस्बे प्लेजेंटविल में 18 साल की नर्सिंग स्टूडेंट पेगी गैल्गानो को वापस कॉलेज लौटना था. वह मां की खराब तबीयत की वजह से प्लेजेंटविल आईं थीं, लेकिन 1973 के तेल संकट की वजह से अमेरिका में तेल और गैस की किल्लत थी. वे गाड़ी लेकर गैस स्टेशन की तलाश में निकलीं, लेकिन कहीं कामयाबी नहीं मिली. पेगी ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि स्टेशन गाड़ियों की कतार देखते ही पंप बंद कर देते थे. 53 साल बाद दुनियाभर में वही दौर लौट आया है, इस बार भी वजह है इजरायल और अमेरिका… तेल और गैस बंद. बढ़ती महंगाई और जंग में धमाकों की गूंज. क्या इस बार तेल संकट 1973 के संकट से बड़ा है? 53 साल पहले क्या हुआ था? आइए समझते हैं एक्सप्लेनर में…

सवाल 1: 1973 का तेल संकट असल में क्या था और क्यों शुरू हुआ?  

जवाब: 1973 की बात है, जब अरब देशों के तेल निर्यातक संगठन (OPEC) ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों पर पूर्ण तेल प्रतिबंध यानी Embargo लगा दिया था. वजह थी यॉम किप्पुर युद्ध. इस जंग में मिस्र और सीरिया ने इजरायल पर हमला किया था ताकि 1967 के छह-दिन युद्ध में खोए इलाके वापस मिल सकें. उस समय अमेरिका ने इजरायल को 2.2 अरब डॉलर की इमरजेंसी मदद दी, जिससे नाराज होकर अरब देशों ने तेल की सप्लाई रोक दी.

1970 के दशक में मिडिल ईस्ट दुनिया का 50% तेल पैदा करता था. OPEC ने प्रोडक्शन 5% हर महीने कम करने और अमेरिका, नीदरलैंड, पुर्तगाल और साउथ अफ्रीका पर बैन लगा दिया. नतीजा? ग्लोबल सप्लाई में 4.5 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) की कमी आ गई, यानी उस समय की कुल सप्लाई का करीब 7%.

 

1970 के दशक में मिडिल ईस्ट दुनिया का 50% तेल पैदा करता था
1970 के दशक में मिडिल ईस्ट दुनिया का 50% तेल पैदा करता था

सवाल 2: 1973 में तेल की कीमतें कितनी बढ़ीं और दुनिया पर क्या असर पड़ा?

जवाब: 1973 में कुछ ही महीनों में तेल की कीमतें चार गुना बढ़ गईं थीं. अमेरिका में एक बैरल 3 डॉलर से 12 डॉलर हो गया था, जो आज के मुकाबले करीब 80 डॉलर तक है. पेट्रोल स्टेशन सूख गए. अमेरिका में फ्यूल राशनिंग लगाई गई, स्पीड लिमिट कम की गईं और साल भर डेलाइट सेविंग टाइम रखा गया.

तेल संकट से यूरोप और जापान भी बुरी तरह प्रभावित हुए. ब्रिटेन में तीन दिन का वर्क वीक शुरू हुआ, यूरोप में रविवार को गाड़ियां चलाने पर बैन लगा दिया. महंगाई बढ़ी, इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन गिरा और कई देश स्टैगफ्लेशन यानी महंगाई और मंदी की चपेट में आ गए. अमेरिका-ब्रिटेन में 1973-75 तक मंदी रही थी.

 

अमेरिका-ब्रिटेन में 1973-75 तक मंदी रही थी
अमेरिका-ब्रिटेन में 1973-75 तक मंदी रही थी

उस समय भारत पर सीधा प्रतिबंध नहीं था, लेकिन असर बहुत गहरा हुआ था. 1973 में भारत का तेल आयात बिल 414 मिलियन डॉलर था, जो 1974 में 1,350 मिलियन हो गया था, यानी तीन गुना. कीमतें चार गुना बढ़ने से महंगाई का तूफान आया, रेलवे कर्मचारियों ने मई 1974 में दो मिलियन मजदूरों का सबसे बड़ा स्ट्राइक किया.

सरकार ने वर्ल्ड बैंक, IMF से मदद मांगी, लेकिन उसमें शर्तें थीं. यह सब विरोधी माहौल बना. जयप्रकाश नारायण के आंदोलन ने बिहार में आग लगा दी और आखिर में 25 जून 1975 को इंदिरा गांधी की सरकार ने देश में इमरजेंसी लगा दी.

सवाल 3: 2026 में आज का ग्लोबल ऑयल क्राइसिस क्या है और क्या 1973 से अलग है?

जवाब: मार्च 2026 में अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर युद्ध शुरू किया. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया, जिस रास्ते से दुनिया का 20% तेल और गैस गुजरता है. नतीजतन, रोजाना 20 मिलियन बैरल तेल की सप्लाई रुक गई.

1973 में 4.5 मिलियन बैरल की कमी थी, आज 20 मिलियन कम है, यानी चार गुना ज्यादा सप्लाई शॉक. ब्रेंट क्रूड की कीमत 66 डॉलर से 100 डॉलर प्रति बैरल पार कर गई. 1973 तेल संकट के बाद बनी इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने कहा है कि यह ‘इतिहास का सबसे बड़ा एनर्जी सिक्योरिटी थ्रेट’ है.

IEA ने अपने 32 सदस्य देशों से 400 मिलियन बैरल तेल स्ट्रेटेजिक रिजर्व से निकालने को कहा है, लेकिन एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर युद्ध लंबा चला तो गैस, डीजल, जेट फ्यूल सब महंगे हो जाएंगे.

सवाल 4: आज का संकट 1973 से ज्यादा खतरनाक क्यों लग रहा है?  

जवाब: सप्लाई का झटका आज 1973 से कहीं बड़ा है. Kiel Institute के अर्थशास्त्री क्लॉस जुर्गेन गर्न कहते हैं कि 1970s में सप्लाई सिर्फ 5% घटी थी, आज ज्यादा घट गई है. शिपिंग एक्सपर्ट लार्स जेनसन कहते हैं, ‘असर 1970s से कहीं बड़ा हो सकता है.’

फिर भी कीमतें चार गुना नहीं बढ़ीं क्योंकि:

  • आज तेल बाजार ज्यादा विविधतापूर्ण है (OPEC की हिस्सेदारी 50% से घटकर 36% रह गई).
  • अमेरिका आज सबसे बड़ा तेल उत्पादक है और पिछले दशक में ग्लोबल सप्लाई का 90% नया तेल उसी ने जोड़ा.
  • दुनिया के पास 8.2 बिलियन बैरल का रिकॉर्ड रिजर्व है.
  • बाजार को उम्मीद है कि युद्ध कुछ हफ्तों में खत्म हो जाएगा.

1973 में कोई नहीं जानता था कि प्रतिबंध कब हटेगा, इसलिए कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं.

 

भारत में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं
भारत में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं

सवाल 5: 2026 का संकट भारत और एशिया पर क्या असर डाल सकता है?

जवाब: भारत आज भी भारी तेल आयातक है. 1973 की तरह आयात बिल बढ़ेगा, महंगाई आएगी. एशिया के देशों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, जो तेल आयात करते हैं, लेकिन 1973 जैसा राजनीतिक उथल-पुथल नहीं होगी क्योंकि आज रिजर्व है, ऊर्जा दक्षता ज्यादा है और अमेरिका-रूस-ईरान पर कुछ प्रतिबंध अस्थायी रूप से हटाए जा रहे हैं.

1973 का संकट डेलिबरेट पॉलिसी था और लंबा चला. 2026 का संकट युद्ध का नतीजा है. सप्लाई शॉक बड़ा है, लेकिन रिजर्व और विविधता ने अभी कीमतों को काबू में रखा. अगर युद्ध जल्दी खत्म हुआ तो 1973 जैसी लंबी मंदी नहीं आएगी, लेकिन अगर तेल के ढांचे को नुकसान पहुंचा तो ग्लोबल इन्फ्लेशन, इंडस्ट्रियल स्लोडाउन और खासकर भारत-एशिया में ऊर्जा सुरक्षा का नया संकट खड़ा हो सकता है.

1973 ने दुनिया को सिखाया कि तेल पर निर्भरता कितनी खतरनाक है. 2026 में भी वही सबक दोहराया जा रहा है, लेकिन अब रिजर्व, अमेरिकी प्रोडक्शन और तेज रिस्पॉन्स मैकेनिज्म हैं. फिर भी, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना याद दिलाता है कि मिडिल ईस्ट अभी भी दुनिया का तेल पाइपलाइन है.



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