‘हमारी शक्तियों के बारे में…’ , ट्रंप के पाषाण युग वाले बयान पर ईरान का पलटवार, कहा- आपके पास अधूरी जानकारी


US Stone Age Threat, Iran Reaction: 2 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण में ईरान को पाषाण युग में भेजने के बयान को लेकर अब तेहरान ने पलटवार किया है. अमेरिका के राष्ट्रपति की तरफ से की गई बयानबाजी को लेकर चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट में युद्ध तबतक जारी रहेगा, जब तक अमेरिका को उस स्थिति में नहीं पहुंचा देंगे, जहां स्थायी अपमान और आत्मसमर्पण की नौबत आए जाए. ईरान के खातम अल अंबिया के सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता ने बयान में इजरायल और अमेरिका के ऊपर विनाशकारी हमले करने की धमकी दी गई है. साथ ही ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उनकी क्षमताएं काफी कम हो चुकी हैं. 

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान की तरफ से पलटवार के कुछ घंटों पहले अपने बयान कहा था कि अगले दो से तीन हफ्तों में अमेरिका ईरान को वापस पाषाण युग में ले जाने वाला है. जहां वे असल में हैं. उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेनाएं युद्ध के मैदान में अपने सभी लक्ष्यों को बहुत जल्द हासिल कर लेंगी. इब्राहिम जोल्फागरी ने बयान में कहा कि हमारी सैन्य शक्ति और उपकरणों के बारे में आपकी खुफिया जानकारी अधूरी है. आप हमारी रणनीति के बारे में कुछ नहीं जानते हो. 

ईरान की अमेरिका को सीधी चेतावनी

उन्होंने अमेरिका को सीधे तौर पर कहा है कि वह यह न मान लें कि अमेरिका ने ईरान की रणनीतिक मिसाइल प्रोडक्शन को नष्ट कर दिया है. प्रमुख रक्षा संपत्तियां, इनमें मिसाइल प्रोडक्शन सुविधाएं, लंबी दूरी के हमलावर और सटीक ड्रोन और आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियां हैं, इनमें इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताएं शामिल हैं. यह अभी सुरक्षित हैं. चालू स्थिति में हैं. 

इसके अलावा ईरान के अधिकारी ने कहा है कि अमेरिका ने जिन जगह पर हमला किया है, वह महत्वहीन हैं. हमारी रणनीतिक सैन्य उत्पादन उन जगह पर होता है, जिन्हें आप नहीं जानते हैं. जहां आप कभी नहीं पहुंच पाएंगे. हमारी मिसाइलों, ड्रोन और रणनीतिक यूनिट्स को गिनने का जोखिम न उठाएं. आप गलत साबित होंगे. आपको कुछ भी हासिल नहीं होगा. ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर शत्रुता शुरू करने के फैसले के बाद से संकल्प लिया है कि वह हर कार्रवाई का जवाब पुरजोर तरीके से देंगे. युद्ध तबतक जारी रहेगा, जबतक आपको (अमेरिका और इजरायल को) स्थायी अपमान, पछतावा और आत्मसमर्पण का सामना नहीं करना पड़ता. 

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