जियोपॉलिटिक्स, टेक्नोलॉजी और स्ट्रैटजी…, मिडिल ईस्ट जंग के बीच बोले नेवी चीफ- बदल रहा सुरक्षित वातावरण


मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के बीच समुद्री सुरक्षा को लेकर नौसेना प्रमुख एडमरिल दिनेश त्रिपाठी ने विशाखापट्टनम में बयान दिया है. उन्होंने पश्चिम एशिया में बदलती परिस्थिति पर अपनी बात रखी है, साथ ही भारत की समुद्री की रक्षा करने के लिए नौसेना की तरफ से प्रतिबद्धता जाहिर की है.   

आज वातावरण तेजी से बदल रहा: नौसेना प्रमुख

उन्होंने कहा है कि आज सुरक्षित वातावरण तेजी से बदल रहा है. इस परिवर्तन के केंद्र में तेजी से बदलते जियोपॉलिटिक्स, तकनीक, और रणनीतियां हैं. पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि इन तीन फैक्टर्स का सबसे ज्यादा प्रभाव मेरिटाइम डोमेन पर पड़ता है. यह एक सम्मिलित प्रभाव होता है. 

उन्होंने कहा कि आज मेरिटाइम डोमेन में कोई भी व्यावधान, लोकल नहीं रहता, बल्कि उसका प्रभाव तुरंत ग्लोबल स्केल पर ऊर्जा सुरक्षा और समुद्र के रास्ते से होने वाले व्यापार दिखाई देता है. 

सेटलाइट सर्विस का बढ़ता दखल चुनौतियां पेश कर रहे: नौसेना प्रमुख

उन्होंने कहा कि साथ ही जीपीएस और सेटेलाइट सर्विस के दखल के बढ़ती घटनाएं और समुद्री अभियानों की सुरक्षा और विश्वसनियता के लिए एक चुनौती प्रस्तुत कर रहे हैं. 

उन्होंने कहा कि यह सभी चुनौतियां मिलकर एक ऐसा ऑपरेटिव वातावरण बना रही हैं, जो लगातार सर्विलांस, लगातार मौजूदगी और आधुनिक कॉम्बेट कैपेबिलिटी की मांग करता है. 

देश की समुद्री सुरक्षा के लिए सदैव तैयार: नौसेना प्रमुख

ऐसे में भारतीय नौसेना जो देश के बढ़ते समुद्री इंटरेस्ट की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध और सदैव तैयार है. इसका फोकस स्पष्ट है कि एक कॉम्बेट रेडी, क्रेडिबल, और फ्यूचर रेडी फोर्स बने रहना है. इससे पहले उन्होंने गुरुवार को कहा था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने में आ रही मुश्किलों का गंभीर आर्थिक असर पड़ा है और ऊर्जा अस्थिरता पैदा हुई है. 

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