म्यांमार के दौरे पर जाएंगे विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह, राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में होंगे शामिल


भारत के विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह 8 से 11 अप्रैल 2026 तक म्यांमार के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे. यह दौरा म्यांमार सरकार के निमंत्रण पर हो रहा है. इस दौरान वे 10 अप्रैल को नेपीदॉ में होने वाले नए राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे.

शपथ ग्रहण समारोह में भागीदारी
10 अप्रैल को म्यांमार की राजधानी नेपीदॉ में नए राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा. इस समारोह में कई देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे. भारत की ओर से विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह इसमें शामिल होंगे. यह दौरा भारत और म्यांमार के बीच राजनयिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

आधिकारिक बैठकें और द्विपक्षीय बातचीत
अपने दौरे के दौरान कीर्ति वर्धन सिंह नेपीदॉ में म्यांमार सरकार के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगे. इन बैठकों में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, सीमा सहयोग और विकास परियोजनाओं पर चर्चा होगी. भारत लंबे समय से म्यांमार के साथ पड़ोसी देश होने के नाते सहयोग बढ़ाने की नीति पर काम कर रहा है.

आर्थिक और विकास सहयोग पर जोर
इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. भारत म्यांमार में सड़क, कनेक्टिविटी, ऊर्जा और विकास से जुड़ी परियोजनाओं में पहले से ही मदद करता रहा है. इस दौरे में इन योजनाओं की प्रगति और आगे की संभावनाओं पर भी बातचीत होने की उम्मीद है.

यांगून में भारतीय समुदाय से मुलाकात
विदेश राज्य मंत्री अपने दौरे के अंत में यांगून भी जाएंगे. यहां वे भारतीय समुदाय के लोगों से मिलेंगे और उनसे बातचीत करेंगे. इसके साथ ही वे भारत के मित्रों से भी संवाद करेंगे और दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे.

म्यांमार की राजनीतिक स्थिति और पृष्ठभूमि
म्यांमार में हाल ही में हुए चुनावों के बाद सैन्य नेता मिन आंग ह्लाइंग को देश का राष्ट्रपति चुना गया है. रिपोर्टों के अनुसार, यह चुनाव ऐसे माहौल में हुआ है जिसमें कई विपक्षी दलों को चुनाव में भाग लेने से रोका गया था. म्यांमार में राजनीतिक स्थिति 2021 से लगातार अस्थिर रही है, जब सेना ने लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को सत्ता से हटा दिया था. उस समय आंग सान सू की की पार्टी आंग सान सू की ने 2015 और 2020 के चुनावों में बड़ी जीत हासिल की थी, लेकिन बाद में सेना ने सत्ता पर नियंत्रण कर लिया.



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