अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित करने में मदद के लिए NATO से वादा चाहते हैं. यह अपील अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने NATO के सेक्रेटरी जनरल मार्क रूटे से की है. ट्रंप ने कहा है कि अगले कुछ दिनों में इस रास्ते को सुरक्षित करने की मदद के लिए ठोस वादे चाहते हैं. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने दो यूरोपीय राजनयिकों के हवाले से यह जानकारी दी है.
ट्रंप की मांग नाटो के उस फैसले के बाद आई है, जब ईरान के खिलाफ अमेरिका के युद्ध में शामिल न होने या अमेरिकी सेना को अपने बेस या हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल न करने के लिए फैसला लिया था. इससे अमेरिका नाराज हो गया था.
नाटो और अमेरिका में असहमति की खाई और गहरी तब हो गई, जब इस नाटों ने अमेरिका को ठेंगा दिखा दिया. अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तेहरान की पकड़ को ढीला करने के लिए इसे एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की मांग की थी. सीजफायर के बाद भी अमेरिका और नाटों के बीच तनाव बना हुआ है. यूरोप ने इस युद्ध को पूरे युद्ध में बाहर ही रखा है.
ईरान ने सीजफायर समझौते के तहत रोजाना 15 जहाजों की दी अनुमति
ईरान ने कहा है कि अमेरिका के साथ हुए संघर्ष विराम समझौते के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से रोजाना 15 से ज्यादा जहाज गुजरने नहीं देगा. 28 फरवरी को शुरू हुए इस युद्ध में ईरान ने इस रास्ते को बंद ही कर रखा है. इससे दुनिया के देशों में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है. इसके चलते दुनिया भर में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. बुधवार को ईरान ने लेबनान में हिजबुल्लाह आतंकवादी समूह पर इजरायल हमलों के जवाब में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से बंद कर दिया.
लेबनान पर हुए हमले में अबतक 112 लोग मारे गए, सैकड़ों घायल
इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच चल रहे युद्ध में कम से कम 112 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए हैं. इससे सीजफायर पर खतरा मंडरा रहा है. इसे अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक नाजुक समझौता करार दिया है. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के एयरोस्पेस कमांडर जनरल सैयद माजिद मौसवी ने एक्स पर लिखा है कि लेबनान के प्रति आक्रामकता ईरान के प्रति आक्रामकता है. ईरान की सेनाएं इजरायल की तरफ से हुए हमले का करारा जवाब देने की तैयारी कर रही हैं. इससे ज्यादा उन्होंने फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी है.
10 मिनट के अंदर हिजबुल्लाह के 100 से ज्यादा ठिकानों पर निशाना
इसके अलावा इजरायल के हालिया हमलों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह एक अलग तरह की झड़प है. इजरायल ने कहा था कि यह समझौता ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के साथ चल रहे उसके युद्ध पर लागू नहीं होता. वहीं, पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए कहा था कि यह लागू होता है. ऐसे में युद्धविराम के बाद जो राहत लेबनान को मिली थी, वो जल्द ही दहशत में बदल गई. इजरायल की सेना ने इसे मौजूदा युद्ध का अपना अबतक का सबसे बड़ा और सुनियोजित हमला बताया. इस इस हमले में बेरूत, दक्षिणी लेबनान और पूर्वी बेका घाटी में महज 10 मिनट के अंदर हिजबुल्लाह के 100 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया गया.
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