कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल ने फिर लगाया अड़ंगा! लिपुलेख विवाद पर भारत ने दिया करारा जवाब


Show Quick Read

Key points generated by AI, verified by newsroom

  • इस साल जुलाई से लिपुलेख और नाथुला से यात्रा शुरू।

कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर भारत और नेपाल सरकार के बीच कई बार विवाद देखने को मिल चुका है. नेपाल की नई बालेन शाह सरकार ने एक बार फिर से रविवार (3 मई, 2026) को मानसरोवर यात्रा को लेकर सीमा संबंधी दावों को उठाया है. जिस पर भारत की विदेश मंत्रालय (MEA) ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि लिपुलेख पास साल 1954 से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए एक स्थापित रास्ता है और इस रास्ते से पिछले कई दशकों से यात्रा लगातार जारी है, यह कोई नया घटनाक्रम नहीं है.

नेपाल की टिप्पणी पर विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रविवार (3 मई, 2026) को नेपाल के विदेश मंत्रालय की ओर से कैलाश मानसरोवर यात्रा के संदर्भ में की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस मुद्दे पर भारत का रुख हमेशा स्पष्ट और स्थिर रहा है. उन्होंने कहा कि लिपुलेख दर्रा साल 1954 से कैलाश मानसरोवर यात्रा का एक स्थापित रास्ता रहा है और इस रास्ते से कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों की यात्रा पिछले कई दशकों से लगातार जारी है. यह कोई नया घटनाक्रम नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘सीमा को लेकर किए जाने वाले दावों के संबंध में भारत ने हमेशा यही कहा है कि ऐसे दावे न तो सही हैं और न ही ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित हैं. इस तरह के एकतरफा और आर्टिफिशियल तरीके से क्षेत्रीय दावों का विस्तार करना किसी भी तरीके से स्वीकार नहीं किया जाएगा.’

यह भी पढे़ंः बंगाल के चुनावी नतीजों पर फलोदी सट्टा बाजार भी कंफ्यूज! ममता पर 130 तो BJP कितना भाव? जानिए सटोरियों ने कहां लगाया पैसा

नेपाल के साथ बातचीत के लिए भारत तैयारः MEA

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘भारत अपने पड़ोसी देश नेपाल के साथ द्विपक्षीय संबंधों के सभी मुद्दों पर रचनात्मक संवाद के लिए तैयार है, जिसमें सहमति से लंबित सीमा विवादों को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से सुलझाना भी शामिल है.’

नेपाल ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर क्या कहा?

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने रविवार (3 मई, 2026) को लिपुलेख से होकर गुजरने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर भारत को एक प्रोटेस्ट नोट लिखा. इसमें नेपाली विदेश मंत्रालय ने कहा कि नेपाल ने अपनी चिंता भारत और चीन के साथ साझा की है. 1816 की सुगौली संधि के मुताबिक लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी का इलाका नेपाल के संप्रभु क्षेत्र का हिस्सा है.

नेपाल ने यह भी कहा कि वह पहले भी भारत से इस इलाके में सड़क निर्माण, व्यापार, पर्यटन और तीर्थयात्रा जैसी एक्टिविटी न करने की अपील करता रहा है. उसने चीन को भी आधिकारिक तौर पर यह जानकारी दी है कि लिपुलेख नेपाल का हिस्सा है.

जुलाई से शुरू होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है. इस साल भी यात्रा उत्तराखंड के लिपुलेख और सिक्किम के नाथुला दर्रे से संचालित होगी. दोनों रूट से 10-10 बैचों में कुल 1,000 श्रद्धालु यात्रा करेंगे, जिनमें लिपुलेख रूट से 500 यात्री शामिल होंगे.

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से संचालित होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा का पहला बैच 4 जुलाई को दिल्ली से रवाना होगा. इससे पहले यात्रियों को 30 जून से 3 जुलाई तक दिल्ली में मेडिकल, डॉक्यूमेंट और ब्रीफिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होगी.

यह भी पढे़ंः यही रात अंतिम, यही रात भारी; किस राज्य में किसकी सरकार? 5 राज्यों के चुनावी नतीजों पर सबकी नजर



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *