ईरान के जब्त फंड से 25% जारी करने के तैयार US, तेल प्रतिबंधों में भी छूट को, ट्रंप के रुख में बड़ा बदलाव!


US Iran War: ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम (सीजफायर) होने के बावजूद दोनों देशों के बीच पूरी सहमति अब तक नहीं बन पाई है. ईरान की ओर से भेजे गए ताज़ा प्रस्ताव को व्हाइट हाउस ने खारिज कर दिया है, जिसमें उसके परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों में छूट जैसे अहम मुद्दे शामिल थे.

हालांकि, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों में आंशिक राहत को लेकर सीमित लचीला रुख दिखाया है.

यूएस का लचीला रुख

रिपोर्ट के मुताबिक, वाशिंगटन इस बात पर सहमत हुआ है कि वह ईरान के फ्रीज किए गए फंड का लगभग 25 प्रतिशत जारी कर सकता है. लेकिन तेहरान अपनी मांगों पर कायम है और वह अपनी संपत्तियों पर पूर्ण अधिकार के साथ-साथ सभी प्रतिबंधों में व्यापक छूट चाहता है. यानी साफ है कि बातचीत जारी है, लेकिन दोनों पक्षों के रुख में अभी भी बड़ा अंतर बना हुआ है, जिससे स्थायी समाधान फिलहाल दूर नजर आ रहा है.

तसनीम न्यूज़ के मुताबिक, ईरान और अमेरिका के बीच मतभेद अब भी अनसुलझे बने हुए हैं. ईरान का कहना है कि अमेरिका अभी भी अवास्तविक मांगें कर रहा है.

जिद पर अड़ा ईरान

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान संघर्ष समाप्त करने, जब्त की गई अपनी संपत्तियों की पूरी वापसी और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के लिए मुआवजे की मांग पर अडिग है. इसके साथ ही, तेहरान ने किसी भी युद्ध-समाप्ति समझौते को परमाणु प्रतिबद्धताओं से जोड़ने से साफ इनकार कर दिया है और अमेरिकी परमाणु मांगों को “राजनीतिक बहाना” बताया है. यानी साफ संकेत है कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी होने के बावजूद बुनियादी मुद्दों पर सहमति बनना अभी भी मुश्किल नजर आ रहा है.

पाकिस्तान के गृह मंत्री की तेहरान यात्रा

इधर, पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी की तेहरान यात्रा को पाकिस्तान और ईरान के मीडिया ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ठप पड़ी ईरान-अमेरिका शांति प्रक्रिया को फिर से शुरू करने की कोशिशों से जोड़ा है. इस यात्रा की पहले से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई थी. डॉन अखबार ने अनाम राजनयिक सूत्रों के हवाले से बताया कि नकवी की यह दो दिवसीय यात्रा उस समय हुई, जब डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान के ताज़ा प्रस्तावों को खारिज कर दिया था.

रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद वार्ता को पूरी तरह विफल होने से बचाने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखे हुए है, क्योंकि पहले दौर की बातचीत से मिली गति अब कमजोर पड़ती दिख रही है. वहीं, तसनीम न्यूज़ ने भी इस यात्रा को “संवाद को सुगम बनाने और क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा देने” की पाकिस्तान की कोशिशों का हिस्सा बताया है.

यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुआ सीजफायर अभी भी कायम तो है, लेकिन होर्मुज के आसपास रुक-रुक कर तनाव जारी है और तेल टैंकरों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है. इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है और क्षेत्रीय हालात अब भी नाजुक बने हुए हैं.

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