चंद्रनाथ रथ हत्याकांड मामलाः CBI ने बलिया निवासी राज सिंह को दी क्लीन चिट, रिहा होने के बाद जानें क्या कहा?


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  • राज सिंह ने CBI की प्रशंसा, UP सरकार की आलोचना की।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सचिव (PA) चंद्रनाथ रथ के हत्याकांड मामले में गिरफ्तार उत्तर प्रदेश के बलिया निवासी राज सिंह को बाइज्जत रिहा कर दिया है. दरअसल, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मामले में अपनी पूरी पड़ताल के बाद आरोपी राज सिंह को निर्दोष करार दिया है. सीबीआई की ओर से निर्दोष साबित होने के बाद राज सिंह बलिया के आनंद नगर स्थित अपने घर पहुंच गए हैं.

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के प्रदेश सचिव और भाजपा नेता राज सिंह ने कहा कि जब कोई निर्दोष फंसता है, तो सिर्फ उस निर्दोष का ही दामन गंदा नहीं होता है, उसके साथ-साथ उसके परिवार का भी दामन गंदा होता है. राज सिंह ने सीबीआई की प्रशंसा करते हुए धन्यवाद दिया, वही उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना की.

भाजपा नेता ने सीबीआई को किया गिरफ्तार

सीबीआई की गिरफ्त से छुटने के बाद मीडिया से बातचीत में भाजपा नेता राज सिंह ने कहा, ‘ये मेरी मां की जीत है, मेरे प्रशंसकों की जीत है और मेरे चाहने वालों की जीत है. जिनकी वजह से आज मैं बाइज्जत बरी होकर यहां पर आया हूं.’ उन्होंने कहा, ‘मैं सीबीआई को बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं, क्योंकि अगर सीबीआई नहीं होती तो मेरे जैसे तमाम लोगों पर कई सारे फर्जी मुकदमे डालकर उनलोगों को जेल की भट्ठी में डाल दिया जा रहा है, नहीं तो उन लोगों का एनकाउंटर कर दिया जा रहा है.’

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राज सिंह ने की उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना

उन्होंने कहा, ‘मैं अपनी सरकार से भी यही कहना चाहूंगा कि अगर कोई बेगुनाह है, तो उनको किसी तरह की सजा नहीं होनी चाहिए. हम जैसे जनप्रतिनिधि, आम लोगों का यही दुर्भाग्य है कि ऐसी प्रशासन व्यवस्था हमारे उत्तर प्रदेश में है. मैं SOG अयोध्या टीम को यह बोलता रह गया कि सर आप मेरी पूरी जांच कर लीजिए, उसके बाद जो फैसला लेना है आप लीजिए, लेकिन उन लोगों ने किसी तरह की कोई जांच नहीं की. उन लोगों के दिमाग में यह भरा था कि ये राज सिंह अपराधी है, राज सिंह ने क्राइम किया है और ऐसे-ऐसे फर्जी मामले में मुझे डाल दिया गया.’

उन्होंने आगे कहा, ‘सीबीआई का मैं तहे दिल से धन्यवाद देना चाहता हूं कि सीबीआई जैसे ऑफिसर जितने भी ऑफिसर थे, जिन्होंने निष्पक्ष होकर जांच किया, किसी प्रकार का कोई दबाव नहीं था और न्याय की जीत हुई सत्य की जीत हुई.

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