हम भारत को खुले दिल, साफ नजरिए… लिपुलेख विवाद पर नेपाल के विदेश मंत्री का बड़ा बयान


Nepal India Bilateral Relation:  लिपुलेख दर्रे को लेकर चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने रविवार को कहा है कि नेपाल भारत के साथ अपने सीमा विवाद को खुले दिल से सुलझाना चाहता है. खनाल ने यह बयान पत्रकारों से बात करते हुए दिया है. उन्होंने कहा के नेपाल भारत के साथ मुद्दों को कूटनीति के जरिए सुलझाना चाहता है. 

खनाल ने अपने बयान में कहा कि हम भारत को खुल दिल, साफ नजरिए और एक पारदर्शी एजेंडे के साथ देखते हैं. इसमें नेपाल का आर्थिक विकास बदलाव शामिल होना चाहिए.

नेपाल के विदेश मंत्री का बयान उस विवाद के बीच आया है, जब काठमांडू ने भारत और चीन के रिश्तों और व्यापारिक रास्ते को फिर शुरू करने के फैसले पर चिंता जताई थी. असल में पिछले साल भारत और चीन ने रिश्तों को फिर से बेहतर बनाने की कोशिशों के तहत सीधी उड़ाने, वीजा और कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने की घोषणा की थी. 

ये भी पढ़ें- महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा को कोर्ट से बड़ी राहत, 2024 जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में मिली रिहाई

क्या है नेपाल का दावा? 

इधर, भारत और चीन के बीच में घिरा नेपाल ने आपत्ति जताई थी. खासकर कालापानी और लिपुलेख इलाके को लेकर काठमांडू की तरफ से बयान भी दिया था. खनाल का कहना है कि तीर्थ यात्राएं अलग-अलग बॉर्डर से होती है. मुख्य चिंता भारत और चीन की तरफ से कालापानी और लिपुलेख इलाके के इस्तेमाल को लेकर है. नेपाल का कहना है कि यह जमीन हमारी है. नेपाल की सहमति के बिना दोनों देश खुद से वे समझौते नहीं कर सकते. 

नेपाल ने अपने दावे में बताया कि लिपुलेख दर्रा भारत और नेपाल के लंबे समय से विवाद का विषय रहा है. यह विवाद 2020 में तब और बढ़ गया, जब नेपाल ने एक राजनीतिक नक्शा जारी किया. इसमें लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को नेपाली इलाके के तौर पर दिखाया  गया है. नेपाल का कहना है कि यह 1816 की सुगौली संधि के तय उसका इलाका है. 

MP News: दिग्विजय सिंह ने 3 भाषा नीति पर PM मोदी को लिखा पत्र, नई व्यवस्था लागू करने पर जताई चिंता

भारत ने नेपाल के दावों को खारिज किया

हालांकि, 1865 में हुए बदलाव में भारत में ब्रिटिश प्रशासन ने लिपुलेख के पास बॉर्डर को कालापानी धारा के वॉटरशेड तक खिसका दिया. इसे बाद में कालापानी इलाके के नाम से जाना गया. ब्रिटिश राज से आजादी के बाद यह इलाके भारत में मिले. इधर, नेपाल के इन दावों को भारत ने पूरी तरह खारिज कर दिया है. 2020 के नक्शे को लेकर नेपाल के एकतरफा और अनुचित कदम की निंदा भी की है. नई दिल्ली का कहना है कि यह हिस्सा उत्तराखंड का है. 1962 के भारत चीन युद्ध के बाद से इस इलाके पर कंट्रोल और प्रशासन के आधार भी भारत इन इलाकों पर अपना दावा करता है. हालांकि, इस पूरे विवाद पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत शांति और कूटनीति के जरिए इस मसले का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *