World Population: 2075 में इस्लाम होगा दुनिया का सबसे बड़ा धर्म, हिंदुओं की जनसंख्या कितनी? नई रिसर्च के आंकड़ों ने चौंकाया


एक नए ग्लोबल रिलीजियस स्टडी में यह बात सामने आई है कि दुनिया में धर्मों का जनसांख्यिकीय केंद्र तेजी से बदल रहा है और यह बदलाव पहले के अनुमान से कहीं ज्यादा तेज है. रिपोर्ट के अनुसार, जनसंख्या वृद्धि, युवाओं की बड़ी आबादी और अफ्रीका व एशिया में आबादी के बढ़ने के कारण इस्लाम दुनियाभर में ईसाई धर्म की तुलना में लगभग दोगुनी तेजी से बढ़ रहा है. हालांकि इतनी तेज वृद्धि के बावजूद यह अनुमान लगाया गया है कि ईसाई धर्म इस सदी के मध्य तक दुनिया का सबसे बड़ा धर्म बना रहेगा. यह स्टडी मैसाचुसेट्स स्थित गॉर्डन-कॉनवेल थियोलॉजिकल सेमिनरी के सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ग्लोबल क्रिश्चियनिटी की ओर से पब्लिश स्टेटस ऑफ ग्लोबल क्रिश्चियनिटी 2026 रिपोर्ट पर आधारित है. 

स्टडी में संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों, जनसंख्या सर्वेक्षणों और कई ईसाई संगठनों व शैक्षणिक संस्थानों के शोध को शामिल किया गया है. इस स्टडी में 2075 तक दुनिया की धार्मिक संरचना का एक अनुमानित ब्योरा पेश किया गया है. रिपोर्ट बताती है कि दुनिया की मुस्लिम आबादी अब दो अरब से ज्यादा हो चुकी है और अगर यही रुझान जारी रहा तो 2075 तक यह लगभग 3.4 अरब तक पहुंच सकती है. इस्लाम की वृद्धि दर लगभग 1.57 प्रतिशत सालाना बताई गई है, जो ईसाई धर्म की 0.95 प्रतिशत वृद्धि दर से काफी ज्यादा है. इसके बावजूद ईसाई आबादी आगे भी सबसे बड़ी रहने की संभावना है. स्टडी के अनुसार, 2075 तक दुनिया में लगभग 2.67 अरब ईसाई होंगे, जबकि मुसलमानों की संख्या करीब 2.1 अरब तक पहुंच सकती है.

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ईसाई धर्म को बदल रहा केंद्र

रिपोर्ट यह भी दिखाती है कि ईसाई धर्म खत्म नहीं हो रहा, बल्कि उसका केंद्र बदल रहा है. जहां यूरोप के कई हिस्सों में चर्चों और ईसाई आबादी में कमी देखी जा रही है, वहीं उप-सहारा अफ्रीका, एशिया के कुछ हिस्सों और लैटिन अमेरिका में ईसाई धर्म तेजी से बढ़ रहा है. एक सदी पहले ईसाई धर्म का मुख्य केंद्र यूरोप था, लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है और अब ईसाई आबादी का बड़ा हिस्सा अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में पाया जाता है.

मिडिल ईस्ट में घट रहे ईसाई धर्म के लोग

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ऐतिहासिक रूप से ईसाई बहुल रहे क्षेत्रों में इसकी संख्या घट रही है. यूरोप में हर साल लगभग 0.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की जा रही है. मिडिल ईस्ट, जहां ईसाई धर्म की ऐतिहासिक जड़ें हैं, वहां यह गिरावट और भी ज्यादा गंभीर है. 1900 में मध्य पूर्व की आबादी में ईसाइयों की हिस्सेदारी 12.7 प्रतिशत थी, जो अब घटकर केवल 4.2 प्रतिशत रह गई है. इसके पीछे युद्ध, पलायन, भेदभाव, आर्थिक संकट, इस्लामी उग्रवाद और लगातार अस्थिरता जैसे कारण बताए गए हैं, जिनकी वजह से कई पुराने ईसाई समुदाय कमजोर हुए हैं.

हिंदू आबादी से जुड़े आंकड़ें

ईसाई, मुस्लिम और दूसरे धर्मों के लोगों के बाद हिंदू चौथा सबसे बड़ा धर्म है. मौजूदा वक्त में एशिया-पैसिफिक इलाके में दुनिया की 99% हिंदू आबादी रहती है,जिसमें से लगभग 95% हिंदू भारत में रहते हैं. भारत, नेपाल और मॉरिशस में हिंदू सबसे बड़ा धार्मिक ग्रुप है. हालांकि, प्यू रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2055 से लेकर 2060 तक आबादी में गिरावट देखने को मिलेगी. हालांकि, 2075 में आबादी को लेकर कोई डेटा मौजूद नहीं है. इसे पहले 2010 से 2020 तक दुनिया भर में हिंदुओं की संख्या 12 फीसदी बढ़ी थी. 

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