यूरोप इन दिनों रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की चपेट में है. दक्षिण-पश्चिमी यूरोप से शुरू हुई यह भीषण हीटवेव अब पूर्वी यूरोप तक फैल चुकी है और हर दिन नए तापमान के रिकॉर्ड बना रही है. फ्रांस, इटली, स्पेन, पोलैंड, चेक गणराज्य और लिथुआनिया समेत कई देशों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है. इस गर्मी ने अब तक यूरोप में कम से कम 1,300 लोगों की जान ले ली है, जिनमें से अकेले फ्रांस में 1,000 से ज्यादा मौतें दर्ज की गई हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने चेतावनी दी है कि यह आंकड़ा और बढ़ सकता है, क्योंकि अस्पतालों और घरों में मौतों की पूरी रिपोर्टिंग अभी बाकी है…
फ्रांस में सबसे गंभीर हालात: तीन दिन में 1000 मौतें
फ्रांस में इस हीटवेव का सबसे भयानक रूप देखने को मिला है. फ्रांस की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी सेंट पब्लिक फ्रांस ने रविवार (28 जून) को ऐलान किया कि 24 जून के बाद से देश में करीब एक हजार से ज्यादा मौतें दर्ज की गई हैं. ये मौतें मुख्य रूप से पिछले हफ्ते के तीन सबसे गर्म दिनों में हुईं.
इन मौतों में 85% से ज्यादा 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग हैं. पेरिस और इले-डी-फ्रांस इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. सबसे ज्यादा परेशानी की बात यह है कि इन मौतों में घरों में होने वाली मौतों की संख्या सामान्य से 40% ज्यादा रही. यानी लोग अस्पतालों तक नहीं पहुंच पाए और अपने ही घरों में दम तोड़ दिया.
फ्रांसीसी स्वास्थ्य एजेंसी ने चेतावनी दी है कि यह शुरुआती नंबर हैं. अस्पतालों, नर्सिंग होम्स और घरों में मौतों की पूरी रिपोर्टिंग के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है. फ्रांस में हीटवेव के दौरान कम से कम 74 लोग नदियों, झीलों और अन्य जलाशयों में डूबकर भी मारे गए हैं.
फ्रांस का राष्ट्रीय तापमान इंडेक्स 29.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो 1947 में माप शुरू होने के बाद से सबसे ज्यादा है. फ्रांस के 44 करोड़ लोग (देश की लगभग पूरी आबादी) हीट अलर्ट की चपेट में हैं.
WHO की चेतावनी: 1,300 मौतें और ‘साइलेंट किलर’ की दस्तक
टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करके बताया कि 21 जून के बाद से पूरे यूरोप में 1,300 से ज्यादा मौतें दर्ज की गई हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि हीट स्ट्रेस को अक्सर ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है, क्योंकि यह चुपचाप जान लेता है, बिना किसी बड़े शोर के.
टेड्रोस ने कहा, ‘यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप है, जो वैश्विक औसत से दोगुनी दर से गर्म हो रहा है. अभी 150 मिलियन लोग भीषण गर्मी के तहत जी रहे हैं, सैकड़ों लोग मारे गए हैं, स्कूल बंद हैं और बिजली ग्रिड चरमरा रहे हैं.’ उन्होंने यह भी कहा कि एक पीढ़ी में एक बार आने वाली हीटवेव अब लगभग हर साल आ रही है.
Europe is the fastest-warming continent on Earth, heating at twice the global average. Right now 150 million people are living under extreme heat, hundreds have died, schools are shut, grids are buckling.
Driven by climate change and global warming, the phenomenon of the…
— Tedros Adhanom Ghebreyesus (@DrTedros) June 28, 2026
WHO ने यूरोपीय देशों से प्रभावी ‘हीट-हेल्थ एक्शन प्लान’ लागू करने की अपील की है. WHO और यूरोप ने हाल ही में बर्लिन में अपनी नई हीट-हेल्थ एक्शन प्लान गाइडेंस पेश की थी. WHO के मुताबिक, पिछले 4 सालों में अकेले यूरोप में गर्मी से दो लाख से ज्यादा लोग मारे गए हैं.
गर्मी में एसी के लिए मारामारी, राजनीतिक बहस गरमाई
भीषण गर्मी की वजह से फ्रांस और इटली समेत कई यूरोपीय देशों में एयर कंडीशनर और पंखों की मांग आसमान छू रही है. यूरोप के ज्यादातर घरों को भीषण गर्मी को झेलने के लिए डिजाइन नहीं किया गया है. यहां एसी की दरें बहुत कम हैं.
कारफोर और अमेजन जैसे बड़े खुदरा विक्रेताओं पर पंखों और एसी की बिक्री तेजी से बढ़ गई है. टेक्नीशियंस के पास इंस्टॉलेशन के इतने ऑर्डर आ रहे हैं कि डिमांड पूरी करना मुश्किल है. मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक ने रॉयटर्स को बताया कि यूरोप में एयर कंडीशनर की बिक्री बहुत मजबूत रही है, खासकर फ्रांस, स्पेन, यूके और जर्मनी में.
दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन बुजुर्गों और कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर सब्सिडी के साथ एयर कंडीशनर लगाने की वकालत कर रही हैं. वहीं, परंपरागत रूप से एसी के खिलाफ रहे ग्रीन पार्टी ने भी माना है कि अब कुछ हद तक एयर कंडीशनिंग जरूरी हो गई है.
वामपंथी दलों का तर्क है कि बड़े पैमाने पर एसी का इस्तेमाल बिजली व्यवस्था पर बहुत ज्यादा दबाव डालेगा और शहरों में गर्म हवा बढ़ाकर जलवायु संकट को और गंभीर बना देगा. यह बहस 2027 के फ्रांसीसी राष्ट्रपति चुनावों से पहले एक बड़ा मुद्दा बन गया है.
पूर्वी यूरोप में टूटे तापमान के रिकॉर्ड
यह गर्मी अब पूर्वी यूरोप तक फैल चुकी है और हर दिन नए रिकॉर्ड बना रही है. 28 जून को:
- लिथुआनिया: देश के दक्षिणी शहर ड्रुस्किनिन्काई में तापमान 36.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो जून महीने का अब तक का सबसे ज्यादा तापमान है. पिछला रिकॉर्ड 35.7 डिग्री सेल्सियस था.
- चेक गणराज्य: राजधानी प्राग के उत्तर में स्थित डोक्सानी में तापमान 41.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. यह लगातार दूसरे दिन नया रिकॉर्ड बना.
- पोलैंड: स्लुबिस शहर में तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. अगर इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि होती है तो यह देश का अब तक का सबसे अधिक तापमान होगा. राजधानी वारसॉ में 37.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसने 2013 का शहर का रिकॉर्ड तोड़ दिया.
Input By : रॉयटर्स