सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (21 मई, 2025) को अशोका यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को अंतरिम जमानत पर रिहाई का आदेश दिया, लेकिन प्रोफेसर को जमकर फटकार भी लगाई है. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि पोस्ट में जो बातें लिखी गई हैं, उसे डॉग व्हिसलिंग कहते हैं. उन्होंने प्रोफेसर से पूछा है कि उन्हें इस चीप पब्लिसिटी की क्या जरूरत है. प्रोफेसर ने भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर पर एक सोशल मीडिया पोस्ट किया था, जिसे लेकर हरियाणा राज्य महिला आयोग ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी. रविवार को प्रोफेसर को हिरासत में लिया गया और मंगलवार को जिला अदालत ने 27 तक अली खान को ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजने का फैसला सुनाया.
प्रोफेसर अली खान ने गिरफ्तारी के खिलाफ 19 मई को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. एसोसिएट प्रोफेसर महमूदाबाद की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने मुख्य न्यायाधीश बूषण रामाकृष्ण गवई के नेतृत्व वाली पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए इस पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था.
हरियाणा पुलिस ने महमूदाबाद के खिलाफ दो प्राथमिकियां दर्ज होने के बाद, 18 मई को उन्हें गिरफ्तार किया था. उन पर आरोप है कि ऑपरेशन सिंदूर के बारे में उनके सोशल मीडिया पोस्ट से देश की संप्रभुता और अखंडता को खतरा पैदा हुआ. महमूदाबाद को 18 मई को सोनीपत की एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया और एक दिन पहले हरियाणा राज्य महिला आयोग की एक शिकायत पर दर्ज मामले में दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया. मंगलवार को सोनीपत की अदालत ने पुलिस हिरासत की अवधि पूरी होने के बाद उन्हें 27 मई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया.