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Rafale Fighter Jets Deal: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना के राफेल फाइटर जेट के खिलाफ चीन-पाकिस्तान के दुष्प्रचार के बावजूद इंडोनेशिया ने फ्रांस से 42 राफेल फाइटर जेट का सौदा किया है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में बुधवार (28 मई 2025) जकार्ता में इस डील पर हस्ताक्षर हुए.

डसॉल्ट एविएशन कंपनी के सीईओ एरिक टैपयिर ने कहा कि 2026 में इंडोनेशिया को पहला राफेल फाइटर जेट मिलेगा. फ्रांस की इंडसॉल्ट एविएशन कंपनी ही राफेल लड़ाकू विमानों का निर्माण करती है.

राफेल फाइटर जेट ने पाकिस्तान में मचाई तबाही

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सुखोई लड़ाकू विमानों के साथ-साथ राफेल फाइटर जेट की स्कैल्प, हैमर और मिटयोर मिसाइल के जरिए पाकिस्तानी एयरबेस और आतंकी कैंपों को जबरदस्त तरीके से नुकसान पहुंचाया था. हालांकि हमले के तुरंत बाद ही पाकिस्तान और चीन की सरकारी मीडिया ने राफेल के नाकाम होने की सच्ची-झूठी खबरों का प्रचार-प्रसार करना शुरू कर दिया था.

अब साफ हो गया है कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद ही इंडोनेशिया ने फ्रांस से राफेल डील की है, हालांकि दोनों देशों में बात लंबे समय से चल रही थी. यहां तक कि चीन की मीडिया ने खबर उड़ा दी थी कि इंडोनेशिया ने राफेल डील रद्द कर दी है.

भारत ने फ्रांस से 26 मरीन वर्जन के सौदे पर हस्ताक्षर किए

भारतीय वायुसेना भी साल 2019 से फ्रांस के लिए 36 राफेल लड़ाकू विमान ऑपरेट करती है. पिछले महीने ही भारत ने फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमानों के 26 मरीन वर्जन के सौदे पर हस्ताक्षर किए थे. डील के अनुसार, फ्रांस 26 फाइटर जेट के साथ हथियार और दूसरे सैन्य उपकरण के अलावा भारत में राफेल फाइटर जेट के फ्यूसलाज के लिए एक निर्माण फैसिलिटी बनाएगा और एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयरिंग ओवरहालिंग) सेंटर भी स्थापित करेगा.

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, वायुसेना के 36 राफेल फाइटर जेट डील की तरह नौसेना के लिए होने वाला सौदा भी इंटरगर्वमेंटल एग्रीमेंट (आईजीए) यानी दोनों देशों की सरकारों के बीच हुआ है. डील के मुताबिक, भारत को फ्रांस से 22 सिंगल सीटर डेक-बेस्ड फाइटर जेट और चार टू इन ट्रेनर एयरक्राफ्ट मिलेंगे. इसके साथ ही पायलट की ट्रेनिंग, सिम्युलेटर (वर्चुयल ट्रेनिंग), हथियार और दूसरे सैन्य साजो सामान और लॉजिस्टिक की जिम्मेदारी भी फ्रांस की होगी.

राफेल में स्वदेशी हथियारों का इंटीग्रेशन होगा

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, आत्मनिर्भर भारत के तहत राफेल में स्वदेशी हथियारों का इंटीग्रेशन भी किया जाएगा. इन हथियारों में अस्त्रा और ब्रह्मोस (एंटी-शिप) मिसाइल शामिल हैं. फ्रांस की डसॉल्ट कंपनी कैरियर-बॉर्न राफेल फाइटर एयरक्राफ्ट का निर्माण करेगी. माना जा रहा है कि अगले तीन साल में नौसेना को डसॉल्ट से पहला मेरीटाइम वर्जन मिल जाएगा. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, साल 2030 यानी डील पर हस्ताक्षर होने के अगले पांच सालों में सभी 26 विमान नौसेना को मिल जाएंगे.

राफेल के फ्यूसलाज और एमआरओ फैसिलिटी भारत में स्थापित होने के मायने ये हैं कि निकट भविष्य में अगर भारतीय वायुसेना को अतिरिक्त लड़ाकू विमान की दरकार होगी तो राफेल ही उस कमी को पूरा करेगा.

इंडियन नेवी को राफेल के मरीन वर्जन की थी जरूरत

भारतीय नौसेना का स्वदेशी विमानवाहक युद्धपोत आईएनएस विक्रांत बनकर तैयार हो चुका है. सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में कोच्चि (केरल) में आईएनएस विक्रांत को नौसेना के जंगी बेड़े में शामिल कर लिया गया था, लेकिन उस पर तैनात करने के लिए भारत के पास फिलहाल कोई मेरीटाइम फाइटर जेट नहीं था.

ऐसे में कमीशनिंग समारोह में नौसेना के दूसरे एयरक्राफ्ट कैरियर, आईएनएस विक्रमादित्य पर तैनात होने वाले फाइटर जेट, मिग-29के को विक्रांत पर तैनात किया गया था. यही वजह है कि नौसेना को जल्द से जल्द राफेल के मरीन वर्जन की दरकार थी. पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान से शुरू हुई तनातनी के बाद भारतीय नौसेना ने आईएनएस विक्रांत को अरब सागर में तैनात कर दिया था. इस दौरान मिग-29के ही विक्रांत पर तैनात थे.



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