क्या राहुल गांधी देंगे कर्नाटक-महाराष्ट्र-हरियाणा और UP में आरोपों पर हलफनामा, चुनाव आयोग ने मांगा जवाब


कर्नाटक में मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों पर चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) ने राहुल गांधी से औपचारिक रूप से कहा है कि अगर उनके पास कोई पुख्ता सबूत हैं, तो वे शपथ पत्र देकर उसे चुनाव आयोग के साथ साझा करें.

वहीं, कर्नाटक की तरह ही महाराष्ट्र और हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने भी राहुल गांधी के दावों पर सवाल उठाए हैं और उनसे शपथ पत्र देकर अपने आरोपों को पुख्ता करने को कहा है. जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने राहुल गांधी के उत्तर प्रदेश के मतदाता के कर्नाटक समेत अन्य राज्यों में रजिस्टर होने के आरोप को सिरे से खारिज किया है.

मुख्य चुनाव पदाधिकारी ने राहुल गांधी को भेजी चिट्ठी में क्या कहा?

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की ओर से भेजी गई चिट्ठी में साफ कहा गया है कि राहुल गांधी को उन सभी मतदाताओं के नाम और विवरण देने होंगे, जिनके नाम कथित तौर पर हटाए गए हैं या जिन्हें अयोग्य घोषित किया गया है. इसके साथ ही यह भी बताना होगा कि वे जानकारी निजी रूप से जानते हैं या किसी अन्य स्रोत से मिली है.

चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि नवंबर, 2024 में ड्राफ्ट मतदाता सूची और जनवरी, 2025 में अंतिम सूची कांग्रेस पार्टी के साथ साझा की गई थी. लेकिन इस दौरान न तो किसी जिलाधिकारी को पहली अपील भेजी गई और न ही मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को दूसरी अपील सौंपी गई. अब चुनाव आयोग ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को शुक्रवार (8 अगस्त, 2025) को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच मिलने का समय भी दिया है, ताकि वे अपने आरोपों से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत कर सकें.

अगर शपथ पत्र में गलत जानकारी पाई गई, तो कानून के तहत दंडनीय अपराध होगा- CEO

कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने राहुल गांधी से साफ तौर पर कहा है कि यदि दिए गए शपथ पत्र में कोई भी गलत जानकारी पाई गई, तो यह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 227 के तहत दंडनीय अपराध होगा.

चुनाव आयोग को उम्मीद, राहुल गांधी जल्द दाखिल करेंगे शपथ पत्र

सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग को उम्मीद है कि राहुल गांधी जल्द अपने आरोपों को साबित करने के लिए शपथ पत्र दाखिल करेंगे. आयोग ने यह भी कहा है कि वह अपना शपथ पत्र सार्वजनिक रूप से साझा करें नहीं तो अपने बयान वापस लें. चुनाव आयोग के सूत्रों ने साफ तौर पर कहा है कि “या तो राहुल गांधी शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करें, या जनता को गुमराह करना बंद करें.” इस पूरे घटनाक्रम पर अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या राहुल गांधी अपने आरोपों को कानूनी रूप से प्रमाणित करने के लिए शपथ पत्र दाखिल करेंगे या नहीं.

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