जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में पेड़ों की अवैध कटाई के आरोपी सभी अधिकारियों पर चलेगा मुकदमा, सुप्रीम कोर्ट के सख्त तेवर के बाद उत्तराखंड सरकार ने दी अनुमति


सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद उत्तराखंड सरकार ने जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में पेड़ों की कटाई और अवैध निर्माण के आरोपी सभी आईएफएस (भारतीय वन सेवा) अधिकारियों पर मुकदमे की अनुमति दे दी है. कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी जल्द फैसला लेने को कहा है. साथ ही उत्तराखंड सरकार से कहा कि वह अपनी विभागीय जांच को भी 3 महीने में पूरी करे.

क्या है मामला?
2021 में उत्तराखंड में हरक सिंह रावत के वन मंत्री जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पाखरो रेंज में टाइगर सफारी परियोजना के लिए 6000 से अधिक पेड़ काटे गए थे. इस परियोजना के तहत चिड़ियाघर से बाघ लाकर उन्हें सफारी के नाम पर वहां रखने की बात कही गई थी. परियोजना में बड़े पैमाने पर अनियमितता और आर्थिक गड़बड़ी के आरोप लगे.

इस मामले में नेशनल पार्क के निदेशक राहुल, डिविजिनल फॉरेस्ट ऑफिसर किशन चंद और अखिलेश तिवारी समेत कई अधिकारियों का नाम सामने आया शुरुआती जांच में किशन चंद को विजिलेंस ने गिरफ्तार भी किया था. बाद में उत्तराखंड हाई कोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंपी. सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे सही ठहराया.

एक अधिकारी पर सरकार मेहरबान
कॉर्बेट के निदेशक राहुल को राज्य सरकार ने बाद में राजाजी नेशनल पार्क का निदेशक बना दिया. सुप्रीम कोर्ट की सख्त फटकार के बाद इस नियुक्ति को पिछले साल सितंबर में रद्द किया गया. अब सीबीआई ने कोर्ट को जानकारी दी थी कि राज्य सरकार ने बाकी अधिकारियों के खिलाफ मुकदमे की अनुमति दे दी है, लेकिन राहुल के मामले में यह अनुमति नहीं दी है.

पिछले सप्ताह चीफ जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस अधिकारी पर राज्य सरकार की मेहरबानी पर सवाल उठाए थे. मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के लिए कहने की चेतावनी दी थी. अब सीबीआई ने बताया है कि राज्य सरकार ने राहुल पर मुकदमे की भी अनुमति दे दी है.



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