‘अगर महिला है तो आप जमानत दे सकते हैं’, BMW हादसे की आरोपी महिला ने कोर्ट से ये क्या कर दी मांग?


पिछले हफ्ते दिल्ली में एक BMW और दोपहिया वाहन की टक्कर में वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी की मौत हो गई, जिसके आरोप में सोमवार (15 सितंबर, 2025) को एक महिला को गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तार की गई आरोपी महिला गगनप्रीत ने बुधवार (17 सितंबर, 2025) को दिल्ली की एक अदालत में सुनवाई के दौरान बड़ा बयान दिया. 

पटियाला हाउस कोर्ट की ओर से सुनवाई को शनिवार के लिए स्थगित किए जाने के बावजूद, आरोपी महिला गगनप्रीत के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश गुप्ता ने मामले में जमानत की मांग करते हुए कहा कि दोपहिया वाहन से टकराने वाली DTC बस और कथित तौर पर वहां से गुजरी एक एम्बुलेंस को भी इस मामले में आरोपी बनाया जाना चाहिए, यह मामला काफी चर्चा में है और पूरे देश में गुस्सा है.

BMW कार ने नवजोत सिंह की बाइक को मारी टक्कर

दरअसल यह पूरी घटना रविवार (14 सितंबर, 2025) को दिल्ली के धौला कुआं के पास घटी, जहां एक BMW कार ने आर्थिक मामलों के विभाग में उप सचिव नवजोत सिंह की बाइक को टक्कर मार दी थी, जिसमें उनकी मौत हो गई. नवजोत की पत्नी जो बाइक के पीछे बैठी थीं, उन्हें भी चोटें आई हैं.

कोर्ट में आरोपी महिला की ओर से पैरवी कर रहे वकील रमेश गुप्ता ने कहा, ‘यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है और हर साल 5000 से ज्यादा ऐसी घटनाएं होती हैं. वहीं वकील ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि आखिर DTC बस के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई. 

पुलिस ने 10 घंटे बाद मामला किया दर्ज

वकील ने आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस का दावा है कि BMW से टकराने के बाद बाइक DTC बस से जाकर टकराई थी. वकील ने ये भी आरोप लगाया कि जहां यह घटना हुई, पुलिस ने कहा कि दुर्घटना के बाद, बाइक DTC बस से टकरा गई तो पुलिस ने बस को जब्त क्यों नहीं किया? वहां से एक एंबुलेंस गुजर रही थी, लेकिन उसने पीड़ितों की मदद करने से इनकार कर दिया.

वकील ने कहा कि पुलिस ने 10 घंटे बाद मामला क्यों दर्ज किया? पुलिस पर बहुत दबाव है, इसलिए वह कुछ भी कर सकती है. गुप्ता ने कोर्ट में अपने मुवक्किल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 लगाने के पुलिस के फैसले पर भी सवाल उठाया. इस धारा के अनुसार, जो कोई भी गैर इरादतन हत्या करता है, उसे आजीवन कारावास या कम से कम 5 साल की कैद या 10 साल तक की सजा हो सकती है.

आरोपी के खिलाफ इन धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज

वकील गुप्ता ने कोर्ट में कहा, ‘पुलिस ने मेरे मुवक्किल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (जो बीएनएस की धारा 105 के बराबर है) कैसे लगाई? जांच अधिकारी अच्छी तरह जानते हैं कि उपधारा ए या बी को शामिल करने की आवश्यकता है. मेरा अनुभव 304 (2) से है, जो अदालत को मुझे जमानत देने का अधिकार देता है. 

आरोपी के वकील ने कहा, ‘अगर वह महिला आरोपी है तो आप मौत की सजा और आजीवन कारावास के मामलों में भी जमानत दे सकते हैं.’ धारा 105 के अलावा, आरोपी पर बीएनएस की धारा 281 (तेज गति से गाड़ी चलाना) और धारा 125बी (दूसरों की जान या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालना) के तहत भी आरोप लगाए गए हैं.

सरकारी वकील ने आरोपी पर उठाए सवाल

हालांकि अभियोजन पक्ष (सरकारी वकील) ने यह सवाल उठाया कि आरोपी ने हादसे के 5 घंटे बाद ही पुलिस को सूचना क्यों दी. उन्होंने कहा, ‘अगर आरोपी को पता था कि पीड़िता को गंभीर चोटें लगी हैं तो उसने उसे तुरंत किसी पास के अस्पताल क्यों नहीं पहुंचाया?’. दिल्ली पुलिस ने यह भी दावा किया कि आरोपी महिला इस घटना में घायल नहीं हुई.

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