ट्रंप के ‘बगराम एयरबेस’ वाले प्लान ने बढ़ाई टेंशन, तालिबान और ड्रैगन भड़के, अमेरिकी राष्ट्रपति को सुनाई दो टूक


अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया कि अमेरिका अफगानिस्तान के बगराम एयरबेस पर दोबारा नियंत्रण पाने की कोशिश कर रहा है, जिससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है. काबुल से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित यह बेस 2021 में अमेरिका की अफगानिस्तान से अव्यवस्थित वापसी से पहले वहां का सबसे बड़ा सैन्य ठिकाना था. ट्रंप ने कहा कि इस बेस का सामरिक महत्व है क्योंकि यह चीन के शिनजियांग स्थित परमाणु हथियार निर्माण केंद्रों के नजदीक है.

उन्होंने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘हम इसे वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं. हमने इसे (तालिबान को) बेवजह दे दिया. बगराम ठीक वहीं है जहां से चीन अपने परमाणु मिसाइल बनाता है और वहां से यह सिर्फ एक घंटे की दूरी पर है.’

चीन की कड़ी प्रतिक्रिया
ट्रंप के इस बयान पर चीन ने सख्त एतराज जताया. चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस तरह की हरकतें क्षेत्र में तनाव बढ़ाएंगी और अस्थिरता पैदा करेंगी. बीजिंग ने जोर देकर कहा कि अफगानिस्तान का भविष्य और सुरक्षा वहीं की जनता तय करेगी, न कि बाहरी सैन्य हस्तक्षेप.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा, ‘चीन अफगानिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करता है. क्षेत्र में तनाव भड़काने से किसी को समर्थन नहीं मिलेगा. हम उम्मीद करते हैं कि सभी पक्ष क्षेत्रीय स्थिरता में रचनात्मक भूमिका निभाएंगे.’

अफगानिस्तान ने भी ठुकराया प्रस्ताव
अफगानिस्तान ने भी ट्रंप के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया. विदेश मंत्रालय के अधिकारी जाकिर जलाल ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिका से बातचीत के लिए काबुल तैयार है, लेकिन किसी भी सूरत में अमेरिकी सेना को अफगानिस्तान में दोबारा ठिकाना बनाने की इजाजत नहीं दी जाएगी. उन्होंने लिखा, ‘अफगानिस्तान और अमेरिका को आपसी सम्मान और साझा हितों के आधार पर राजनीतिक और आर्थिक संबंध आगे बढ़ाने चाहिए, लेकिन किसी भी हिस्से में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.’

क्या है बगराम एयरबेस?
बगराम एयरबेस एक विशाल सैन्य ठिकाना है, जिसे अमेरिकी सैनिकों ने चार साल पहले 2021 में छोड़ दिया था, जब तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन के आदेश पर अमेरिका ने अफगानिस्तान से अचानक वापसी की थी और उसी दौरान तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया था.



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