अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ताइवान के लिए 40 करोड़ डॉलर (करीब 3,300 करोड़ रुपये) के सैन्य पैकेज को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है. ट्रंप का यह कदम चीन के साथ व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है. ऐसे में ताइवान को अमेरिका से धोखा मिलने की आशंका जताई जा रही है.
लंबे समय से ताइवान को हथियार देता रहा है अमेरिका
वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ताइवान को चीन के खिलाफ लगातार हथियार मुहैया कराता रहा है. हाल ही में गोला-बारूद और ड्रोन भेजे जाने थे, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इस पर रोक लगा दी. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह ताइवान को समर्थन देने के वॉशिंगटन के पुराने नजरिए से बड़ा बदलाव है.
व्यापार समझौते के लिए चीन से नजदीकी
ट्रंप प्रशासन का यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका और चीन के बीच तनाव कम करने की कोशिशें तेज हैं. ट्रंप की जल्द ही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की संभावना है. ऐसे में ताइवान पर चीन के हमले की धमकियों के बावजूद सैन्य सहायता रोकी गई है.
बाइडेन से अलग है ट्रंप का रुख
पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में ताइवान को तेजी से हथियारों की आपूर्ति हुई थी. इसके उलट, ट्रंप का कहना है कि ताइवान एक धनी देश है और उसे अमेरिकी मदद पर निर्भर रहने के बजाय अपने हथियार खुद खरीदने चाहिए. ट्रंप ने यही तर्क यूक्रेन के लिए भी दिया है.
ताइवान ने बढ़ाया रक्षा बजट
ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंगते ने हाल ही में ड्रोन और नौसैनिक जहाजों के लिए बजट को मंजूरी दी है. ट्रंप के पहले कार्यकाल (2017-2021) में अमेरिका ने ताइवान को 20 अरब डॉलर के हथियार बेचे थे, जिनमें F-16 लड़ाकू विमान और अब्राम टैंक शामिल थे. लेकिन दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप इस सैन्य सहयोग को अहमियत नहीं दे रहे.
बैठकों और दौरे भी रद्द
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी और ताइवानी रक्षा अधिकारियों की बैठकों को रद्द कर दिया है. इसके अलावा राष्ट्रपति लाई को अगस्त में न्यूयॉर्क और डलास का दौरा न करने की भी सलाह दी गई.