अहमदाबाद विमान हादसे की जांच की निष्पक्षता पर याचिकाकर्ता ने उठाए सवाल, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब


12 जून को अहमदाबाद में हुए विमान हादसे की निष्पक्ष जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है. सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन नाम की संस्था ने आरोप लगाया है कि 260 लोगों की मौत वाली इस दुर्घटना की जांच पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से नहीं हो रही है. कोर्ट ने याचिका पर केंद्र सरकार, नागरिक उड्डयन निदेशालय (DGCA) और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) से जवाब मांगा है.

क्या है मामला?
12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रहा एयर इंडिया का बोइंग विमान टेक ऑफ के कुछ ही देर बाद गिर गया था. इससे विमान में बैठे 241 लोगों की मृत्यु हो गई थी. जिस जगह पर विमान गिरा, वहां भी 19 लोग मारे गए. अब एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि घटना के 100 दिन से भी अधिक का समय बीत जाने के बाद भी लोगों को पता नहीं है कि यह दुर्घटना कैसे हुई. इसके लिए कौन जिम्मेदार है?

याचिकाकर्ता की दलील
याचिकाकर्ता के लिए वकील प्रशांत भूषण जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच के सामने पेश हुए. उन्होंने कहा कि इस मामले में DGCA की भूमिका भी सवालों में है, लेकिन जांच टीम में DGCA के 3 अधिकारी रखे गए हैं. हादसे में बचे इकलौते जीवित गवाह के बयान को भी प्रारंभिक रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया है.

‘सिर्फ पायलट पर दोष मढ़ने की कोशिश’
प्रशांत भूषण ने कहा कि शुरुआती जांच रिपोर्ट के सिर्फ चुनिंदा हिस्से को जारी किया गया है. तकनीकी और मशीनी कमियों को नजरअंदाज कर सिर्फ पायलट की गलती को सामने लाया गया. इससे जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं. भूषण ने निष्पक्ष जांच टीम के गठन की मांग की. उन्होंने यह भी कहा कि विमान की तकनीकी बातों को दर्ज करने वाले फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर की जानकारी सार्वजनिक की जाए.

कोर्ट ने क्या कहा?
जजों ने कहा कि शुरुआती जांच रिपोर्ट के बाद सिर्फ पायलट की गलती पर प्रमुखता से चर्चा होना दुर्भाग्यपूर्ण था, लेकिन सारी जानकारी सार्वजनिक करने की याचिकाकर्ता की मांग भी सही नहीं लगती. उम्मीद की जानी चाहिए कि अंतिम जांच रिपोर्ट में सभी बातों का जवाब मिलेगा. कोर्ट याचिका में जताई गई चिंता से सहमत है इसलिए, नोटिस जारी कर रहा है. यह नोटिस इस सीमित सवाल पर है कि क्या हादसे की स्वतंत्र, निष्पक्ष और तेज जांच हो रही है.



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