बांग्लादेश की अवामी लीग पार्टी ने अपने नेता अबू बक्र सिद्दीकी मुन्ना की ‘हिरासत में मौत’ को हत्या करार दिया है. अवामी लीग ने मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर आरोप लगाया कि वो उनके नेताओं और कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न कर रही है. गैबांधा जिला जेल में बंद अबू बक्र सिद्दीकी मुन्ना की सोमवार (22 सितंबर, 2025) को मृत्यु हो गई थी.
यूनुस शासन की कड़ी आलोचना करते हुए, पार्टी ने कहा कि बांग्लादेश की जनता देख रही है कि कैसे जबरदस्ती सत्ता पर कब्जा करने वाले, हत्यारे, फांसीवादी यूनुस और उनके साथी विभिन्न तरीकों से अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या कर रहे हैं.
अवामी कार्यकर्ताओं पर फर्जी आरोप: पार्टी
अवामी लीग ने एक बयान जारी किया और कहा, ‘गैबांधा के फुलछारी उपजिला के कांचीपाड़ा यूनियन में अवामी लीग के नेता और यूनियन परिषद के पूर्व अध्यक्ष अबू बक्र सिद्दीकी मुन्ना (मुन्ना चेयरमैन) की हत्या कर दी गई है. हम जबरदस्ती सत्ता पर कब्जा करने वाले, हत्यारे, फांसीवादी यूनुस और उनके साथियों की ओर से सुनियोजित तरीके से की गई हत्या की कड़ी निंदा और विरोध करते हैं.’
दल ने कहा, ‘हम शोक संतप्त परिवार के साथ अपनी एकजुटता भी व्यक्त करते हैं और यह विश्वास दिलाते हैं कि उन्हें आगे चलकर न्याय जरूर मिलेगा.’ पार्टी ने आरोप लगाया कि यूनुस शासन अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं, 14-दलीय गठबंधन के नेताओं और विभिन्न व्यवसायों के लोगों को फर्जी मामले में फंसा रहा है.’
बांग्लादेश में बंदियों को नरकीय यातनाएं
अवामी लीग के अनुसार, जेलों को दुनिया की सबसे सुरक्षित जगहों में से एक माना जाता है, लेकिन बांग्लादेश में बंदियों को नरकीय यातनाएं दी जा रही हैं. इसने यह भी आरोप लगाया कि कैदियों को शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी जा रही हैं, जिसके परिणामस्वरूप हिरासत में मौतों की संख्या हर दिन बढ़ रही है.
पार्टी ने आगे कहा कि हाल ही में, सिलहट, मौलवीबाजार और गैबांधा जिलों सहित देश के कई जिलों में हिरासत में हत्याएं हुई हैं. जनता की चिंता और शोक संतप्त परिवारों की चीख-पुकार के बावजूद यूनुस सरकार बेपरवाह बनी हुई है.
अवामी लीग के नेताओं को दी जा रही मानसिक यातनाएं
पार्टी ने कहा, ‘अभी भी अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं को तरह-तरह की यातनाएं देकर मारा जा रहा है. सभी के खिलाफ झूठे और उत्पीड़नकारी मामले दर्ज किए जा रहे हैं. एक मामले में जमानत मिल जाती है तो दूसरे मामले में ‘दिखाई गई गिरफ्तारी’ का इस्तेमाल करके उन्हें अन्यायपूर्ण तरीके से हिरासत में रखा जाता है. इस तरह, शारीरिक यातना के साथ-साथ अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं को मारने के लिए मानसिक यातनाएं भी दी जा रही हैं.’
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