अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आएंगे भारत, UNSC से मिली मंजूरी, पाकिस्तान को लगा तगड़ा झटका



अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी के अगले हफ्ते भारत आने का रास्ता साफ हो गया है. तालिबान के सत्ता में आने के बाद किसी अफगानी मंत्री की यह पहली भारत यात्रा होगी. उन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की ओर से भारत यात्रा की मंजूरी दे दी गई है क्योंकि वे अभी भी UNSC नियम 1988, यानी तालिबान प्रतिबंध लिस्ट के अंतर्गत हैं. इस लिस्ट में शामिल होने के कारण उन पर यात्रा प्रतिबंध लगा हुआ है.

कब भारत आएंगे आमिर खान मुत्ताकी?

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की मंजूरी मिलने के बाद आमिर खान मुत्ताकी को 9 से 16 अक्तूबर तक नई दिल्ली दौरे की इजाजत दी गई है. आमिर खान मुत्ताकी 6 अक्टूबर को रूस की यात्रा करेंगे जहां वह मॉस्को फॉर्मेट की सातंवीं वार्ता में शिरकत करेंगे. 

ऐसा पहली बार हो रहा है जब तालिबान इस बहुपक्षीय मंच पर किसी मेहमान के रूप में नहीं, बल्कि एक सदस्य के तौर पर हिस्सा लेगा. भारत तालिबान में कई विकास परियोनाओं का काम कर रहा है. तालिबान के अधिकारियों ने भी भारत के साथ रिश्ते मजबूत करने की अपील की है.

पाकिस्तान को लगा तगड़ा झटका

अफगानिस्तान के विदेश मंत्री का उच्चस्तरीय बैठकों के लिए नई दिल्ली आ रहे जो पाकिस्तान और चीन के खिलाफ भारत का रणनीतिक कदम है. पाकिस्तान शुरू से ही चाहता रहा है कि भारत और अफगानिस्तान साथ न आएं. यही कारण कि उसने पिछली बार के मुत्ताकी के भारत दौरे से पहले अडंगा डाल दिया था और उनकी यात्रा रद्द हो गई थी. हालांकि इस बार भारत की तैयारी के आगे पाकिस्तान की एक न चली.

मुत्ताकी अगस्त 2021 से अफगानिस्तान के विदेश मंत्री हैं. इससे पहले मई में मुत्ताकी ने बीजिंग में चीन और पाकिस्तान के विदेश मंत्री वांग यी और इशाक डार के साथ एक अनौपचारिक बैठक की थी. इस बैठक में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) को अफगानिस्तान तक विस्तार करने पर चर्चा हुई थी.

पिछले महीने जयशंकर-मुत्ताकी के बीच फोन पर हुई बात

भारत ने 60 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत वाले सीपीईसी के निर्माण का विरोध किया है, क्योंकि यह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से होकर गुजर रहा है. तालिबान ने 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले की भी निंदा की थी. आमिर खान मुत्ताकी और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 1 सितंबर 2025 को फोन पर बात की थी. उस समय भारत ने अफगानिस्तान में आए भूकंप के बाद राहत सामग्री भेजी थी.

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