ट्रंप के टैरिफ के बीच भारत को मिला एक और देश का सपोर्ट, ट्रेड डील के साथ इन सेक्टरों पर भी फोकस



स्विट्जरलैंड सरकार में आर्थिक मामलों के अधिकारी मार्टिन सलादीन ने बुधवार (15 अक्तूबर 2025) को कहा कि अमेरिकी टैरिफ के बीच उनका देश आर्थिक साझेदार के रूप में भारत की ओर देख रहा है. उन्होंने ट्रंप के टैरिफ को चिंताजनक बताते हुए कहा, “स्विट्जरलैंड पर भी इस समय 39 फीसदी टैरिफ है, जो बहुत ज्यादा. यह निश्चित रूप से एक चुनौती है. साथ ही यह एक अवसर भी है.”

‘हमारी रणनीति में भारत बड़ी प्राथमिकता’

मार्टिन सलादीन ने कहा, “हम जो सालों से कोशिश कर रहे हैं वो है बजारों में विविधता लाना. बिजनेस के तौर पर हमारी रणनीति में भारत एक बड़ी प्राथमिकता है.” स्विट्जरलैंड उन देशों में शामिल हैं, जिस पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सबसे ज्यादा शुल्क लगाए हैं. यहां अगस्त 2025 से 39 फीसदी टैरिफ लागू की गई थी. ऐसा तब हुआ जब स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति करिन सटर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल विशिंगटन डीसी में ट्रंप के साथ बैठक के बाद ट्रेड डील करने में विफल रहा.”

किन क्षेत्रों में भागीदारी चाहता है स्विट्जरलैंड? 

निवेश को लेकर मार्टिन सलादीन ने कहा कि स्विट्जरलैंड रेलवे, रोपवे और टनल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में अधिक सहयोग चाहता है. भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) और आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA) पर 10 मार्च 2024 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर हुए थे. यह 1 अक्टूबर 2025 से लागू हुआ.

यह चार विकसित यूरोपीय देशों स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन के साथ भारत का पहला मक्त व्यापार समझौता है. इस समझते का लक्ष्य अगले 15 सालों में भारत में 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश लाना है. साथ ही 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार का सृजन करना है.

मार्टिन सलादीन ने कहा, “हमने अभी-अभी ईएफटी और भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौता लागू किया है. TEPA समझौते के अंतर्गत निवेश को लेकर हम सहायता के लिए भारत पर निर्भर हैं. भारत निवेश को बढ़ावा देने के लिए स्विट्जरलैंड पर निर्भर है.”

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