Army Day 2026: LoC पर आतंकियों को खदेड़ने वाले अग्निवीर कुलबीर सिंह को वीरता मेडल! मिला इतिहास रचने वाला सम्मान


एलओसी पर घुसपैठ करने की साजिश रच रहे आतंकियों को खदेड़ने वाले अग्निवीर कुलबीर सिंह को थलसेना दिवस के मौके पर वीरता मेडल से नवाजा गया है. सिख लाइट इन्फेंट्री (सिखलाई) से ताल्लुक रखने वाले कुलबीर सिंह, देश के पहले अग्निवीर है, जिन्हें वीरता मेडल से नवाजा गया है. सेना दिवस की पूर्व संध्या पर जयपुर में आयोजित अलंकरण समारोह में थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अग्निवीर कुलबीर सिंह को सेना मेडल (वीरता) से सम्मानित किया. गुरुवार को थलसेना अपना 78वां स्थापना दिवस मना रही है. इस वर्ष थलसेना दिवस से जुड़ी समारोह और सैन्य परेड को राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित किया गया है.

जानकारी के मुताबिक, जनवरी 2025 में अग्निवीर कुलबीर सिंह, भारतीय सेना की एक अग्रिम चौकी की सुरक्षा में तैनात थे. उसी दौरान, नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर आतंकियों ने घुसपैठ करने की कोशिश की थी. कुलबीर सिंह ने बेहद बहादुरी और सूझबूझ से अपनी लाइट मशीन गन (एलएमजी) से आतंकियों पर जबरदस्त फायरिंग की. गोलियों की बौछार से आतंकी, पाकिस्तानी सीमा में भाग खड़े हो गए.

 अलंकरण समारोह का आयोजन

अलंकरण समारोह बुधवार (15 जनवरी 2026) की शाम को आयोजित किया गया था, जिसमें थलसेना प्रमुख ने अग्निवीर कुलबीर सिंह समेत कुल 10 सैनिकों को उत्कृष्ट बहादुरी के लिए सेना मेडल (वीरता) से सम्मानित किया. इसके अलावा सेना की अलग-अलग यूनिट्स को प्रशस्ति-पत्र से सम्मानित किया गया. इनमें से 26 यूनिट्स ऐसी हैं , जिन्हें पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर में उत्कृष्ट कार्यों के लिए दिया गया है. 

अग्निवीरों के पहले बैच की सेवाएं

इस वर्ष (2026 में) अग्निपथ स्कीम के तहत सेना में शामिल हुए अग्निवीरों के पहले बैच की सेवाएं पूरी होने जा रही हैं. ऐसे में इन अग्निवीरों में से 25 प्रतिशत को एक रेग्युलर सोल्जर यानी सैनिक के लिए चुना जाएगा. इन 25 प्रतिशत अग्निवीरों को पिछले चार वर्ष की उत्कृष्ट सेवा और कर्तव्य-परायणता के आधार पर चुना जाएगा. बाकी 75 प्रतिशत को रिटायर कर दिया जाएगा. ये 75 अग्निवीर, राज्यों की पुलिस, पैरा-मिलिट्री फोर्स या फिर डिफेंस कंपनियों में नौकरियां पा सकते हैं, जहां उनके लिए खास आरक्षण रखा गया है.

कब शुरू हुई थी अग्निवीर बनाने की योजना?

वर्ष 2022 में सरकार ने सेना के तीनों अंगों यानी थलसेना, वायुसेना और नौसेना में सीधे सैनिकों की भर्ती के बजाए अग्निपथ स्कीम के जरिए अग्निवीर बनाने की योजना शुरू की थी. इन चार वर्षों के दौरान, अग्निवीरों को पूर्णकालिक सैनिक नहीं माना जाता है. इस दौरान, ये सैनिक बनने के लिए तैयार होते हैं. शुरुआत में इस स्कीम को लेकर जबरदस्त बवाल और विवाद हुआ था. लेकिन सरकार ने अग्निपथ स्कीम को जारी रखा है.

ये भी पढ़ें: ‘आप मेरे मुंह में शब्द मत डालें’, ममता बनर्जी के लिए सिब्बल ने दी ऐसी दलील, SC को आया गुस्सा, लगाई फटकार





Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *