बांग्लादेश में BNP की भारी जीत और तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने की संभावना के बाद भारत अब दोनों देशों के बीच संबंधों को दोबारा मजबूत करने की योजना बना रहा है. भारत इस चुनाव को एक ‘कूटनीतिक रीसेट’ का मौका मान रहा है. केंद्र सरकार का मानना है कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार के साथ ही लंबे समय तक स्थिरता और भरोसा बना रह सकता है. भारत ने हमेशा चुनी हुई सरकारों के साथ काम किया है और अब BNP की जीत को ‘1971 की भावना और उदार मूल्यों’ की जीत के रूप में देखा जा रहा है.
तारिक रहमान पर भारत का पॉजिटिव रुख
भारतीय अधिकारियों ने कहा कि वे तारिक रहमान के लिए ‘सतर्क आशावादी’ हैं. उनका मानना है कि तारिक आर्थिक हकीकतों और क्षेत्रीय स्थिरता को ध्यान में रखकर ज्यादा व्यावहारिक रुख अपना सकते हैं. पिछले कुछ महीनों में मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार के दौरान संबंध खराब हुए थे. भारत का कहना है कि उस सरकार ने ‘अराजकता और अस्थिरता’ पैदा की, लोकतंत्र की बहाली में देरी की, भारत और भारतीय मीडिया पर दोष मढ़ा. लेकिन अब चुनी हुई सरकार के साथ भारत रचनात्मक तरीके से जुड़ना चाहता है.
भारत की मुख्य रणनीति क्या है?
भारत की 4 बड़ी मुख्य रणनीति हैं. इनमें:
- लोकतंत्र का समर्थन करना और भरोसा दोबारा बनाना.
- सुरक्षा और अल्पसंख्यक अधिकारों पर सतर्क रहना.
- तारिक रहमान को व्यावहारिक नेता मानकर आर्थिक और क्षेत्रीय मुद्दों पर सहयोग बढ़ाना.
- एक वरिष्ठ भारतीय प्रतिनिधि तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने की संभावना है, जो संबंध सुधारने का संकेत होगा. इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर खालिदा जिया की मौत पर श्रद्धांजलि देने ढाका गए थे और तारिक से मिले थे.
भारत ने इस रणनीति पर काम भी शुरू कर दिया है. BNP की जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फौरन तारिक रहमान को फोन किया और बधाई दी. PM मोदी ने X पर लिखा कि दोनों देशों के गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं. उन्होंने कहा, ‘मैं आपके साथ मिलकर हमारे बहुआयामी संबंधों को मजबूत करने और साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने का इंतजार कर रहा हूं. भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश का समर्थन करता रहेगा.’
मोहम्मद यूनुस के बिगाड़े रिश्ते कैसे सुधरेंगे?
जमात-ए-इस्लामी और इस्लामी कट्टरपंथी समूहों को अंतरिम सरकार ने ज्यादा जगह दी, जो भारत के लिए चिंता का विषय है. ये समूह पाकिस्तान समर्थक हैं और अल्पसंख्यकों (खासकर हिंदुओं) पर हमलों में शामिल रहे. हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर भारत ने बार-बार चिंता जताई, लेकिन अंतरिम सरकार ने सही कदम नहीं उठाए. अब उम्मीद है कि तारिक रहमान की सरकार सीमा सुरक्षा, घुसपैठ और क्षेत्रीय स्थिरता पर नजर रखेगी. BNP के पिछले कार्यकालों में भारत के साथ रिश्ते कभी-कभी तनावपूर्ण रहे, लेकिन अब आर्थिक जरूरतों से तारिक ज्यादा सहयोगी हो सकते हैं. भारत का फोकस अब व्यावहारिक सहयोग पर है. भारत अब व्यापार, सुरक्षा, पानी बंटवारा (जैसे तीस्ता) और आतंकवाद विरोधी सहयोग चाहता है.
बांग्लादेश में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
तारिक रहमान की BNP को 212 सीटों पर जीत मिली. यानी बहुमत के आंकड़े 151 को पार कर लिया है. इस अलायंस में BNP समेत 10 पार्टियां हैं. डॉ. शफीकुर रहमान की जमात-ए-इस्लामी की कमान वाले 11 पार्टियों के गठबंधन को सिर्फ 77 सीटें मिली हैं. जमात चीफ रहमान ने ढाका-15 सीट से जीत दर्ज की है. जमात वाले अलायंस में शामिल नेशनल सिटीजन पार्टी यानी NCP को 6 सीटें मिलीं. ये वही NCP है, जो जुलाई-अगस्त 2024 के सत्ताविरोधी छात्र आंदोलन से निकली. यह पहला ऐसा चुनाव है, जिसमें शेख हसीना की आवामी लीग पार्टी बैन की वजह से नहीं लड़ी. 12 मई 2025 को चुनाव आयोग ने पार्टी का रजिस्ट्रेशन भी सस्पेंड कर दिया था.