China help Pakistan during operation sindoor Mao Ning Reacts says cooperation is normal Not target India | ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ‘ड्रैगन’ ने की पाकिस्तान की मदद? सवाल पर चीन बोला


China Helped Pakistan During Operation Sindoor: हाल ही में भारतीय सेना के डिप्टी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह ने एक अहम बयान में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को चीन का पूरा समर्थन मिला. उन्होंने आरोप लगाया कि चीन ने इस संघर्ष को एक “लाइव लैब” की तरह इस्तेमाल किया, जिसमें उसने अपने कई रक्षा सिस्टम को परखा और पाकिस्तान को सैटेलाइट से लाइव इनपुट दिए. इस मुद्दे पर जब चीन के विदेश मंत्रालय से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो प्रवक्ता माओ निंग ने चीन-पाकिस्तान रक्षा सहयोग को “सामान्य और किसी तीसरे पक्ष के खिलाफ नहीं” बताया.

चीन ने पाकिस्तान को दिया सैटेलाइट सपोर्ट?
जनरल राहुल सिंह के अनुसार, भारत-पाक के बीच चले चार दिवसीय सैन्य संघर्ष के दौरान चीन ने पाकिस्तान को सैन्य तकनीकी मदद दी. उन्होंने कहा कि चीन ने भारतीय सेना की गतिविधियों पर निगरानी के लिए अपने उपग्रहों का इस्तेमाल किया.पाकिस्तान को रियल टाइम इनपुट दिए. यहां तक कि भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ के बीच जब संघर्ष विराम पर बातचीत हो रही थी, तब भी चीन पाकिस्तान की सहायता कर रहा था. यह चीन की प्राचीन 36 रणनीतियों में से एक किराए की छुरी से वार करना (Kill with a borrowed knife) नीति का उदाहरण है.

चीन की प्रतिक्रिया
चीन की विदेश मंत्रालय प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि वह जनरल राहुल सिंह की ओर से जारी जानकारियों से परिचित नहीं हैं. पाकिस्तान और चीन पारंपरिक मित्र हैं और उनका रक्षा सहयोग सामान्य है, जो किसी तीसरे देश को निशाना नहीं बनाता. चीन, भारत और पाकिस्तान को महत्वपूर्ण पड़ोसी मानता है और क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए काम करता रहा है.

भारत-चीन संबंध सुधार की दिशा में दिया बयान
माओ निंग ने आगे कहा कि चीन और भारत के संबंध इस समय एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं. बीजिंग भारत के साथ मिलकर सकारात्मक और स्थिर संबंधों की दिशा में काम करना चाहता है. चीन ने हाल के हफ्तों और महीनों में भारत-पाक टकराव की घटनाओं को करीब से फॉलो किया है और शांति-वार्ता को बढ़ावा देने की कोशिश की है.

क्षेत्रीय शांति में चीन की भूमिका
चीन ने दोहराया कि वह भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद और परामर्श के जरिए विवादों को सुलझाने के प्रयासों का समर्थन करता है. बीजिंग इस दिशा में एक रचनात्मक भूमिका निभाता रहेगा ताकि दक्षिण एशिया में शांति बनी रहे. 

राफेल के सवाल पर नहीं दिया जवाब 
माओ निंग ने उन खबरों पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि भारत-पाकिस्तान तनाव के बाद चीन ने फ्रांस में बने राफेल लड़ाकू विमानों की क्षमता पर संदेह जताने के लिए अपने दूतावासों को निर्देश दिए हैं. उन्होंने संक्षेप में कहा, जिस बात का आपने जिक्र किया है, उसकी मुझे जानकारी नहीं है.



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