Donald trump announce us TARIFF deals aroud the world today 7 July 2025 US Trade Policy Retaliatory Tariff


US Trade Policy: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (07 जुलाई, 2025) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (Truth Social) पर एक अहम घोषणा की. उन्होंने बताया कि अमेरिका के विभिन्न देशों के साथ टैरिफ (शुल्क) से जुड़े समझौते और पत्र आज 7 जुलाई से लागू किए जाएंगे. 

ट्रंप ने पोस्ट में लिखा, “मैं यह घोषणा करते हुए बेहद खुश हूं कि संयुक्त राज्य अमेरिका के टैरिफ लेटर्स और समझौते, दुनिया के विभिन्न देशों के साथ सोमवार 7 जुलाई, दोपहर 12 बजे (ईस्टर्न टाइम) से भेजे और लागू किए जाएंगे.”

ट्रंप के इस फैसले के क्या हैं मायने?

अमेरिकी राष्ट्रपति के इस फैसले से साफ है कि ट्रंप प्रशासन अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर अपनी पकड़ और कड़ा रुख और मजबूत करने जा रहा है. हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन देशों के साथ ये समझौते होंगे या किन उत्पादों पर टैरिफ लागू होगा, लेकिन माना जा रहा है कि इसका असर चीन, यूरोपीय यूनियन और अन्य प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर पड़ सकता है.

डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रैल में किया था ये ऐलान

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ महीने पहले अप्रैल में यह ऐलान किया था कि अब कई देशों पर 10% बेस टैरिफ के साथ अतिरिक्त टैक्स भी लगाया जाएगा, जो कुछ मामलों में 50% तक हो सकता है. हालांकि, इन ज्यादा टैरिफ को लागू करने से पहले ट्रंप प्रशासन ने 90 दिनों का समय दिया था ताकि बातचीत की गुंजाइश बनी रहे. यह मोहलत अब 9 जुलाई को खत्म हो रही है.

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर अब भी सस्पेंस

अमेरिका और भारत के बीच अब तक कोई भी ट्रेड समझौता नहीं हो पाया है. ट्रंप प्रशासन द्वारा लगातार दबाव बनाए जाने के बावजूद दोनों देशों के बीच बातचीत किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है.

वहीं, यूरोपीय संघ (EU) के राजनयिकों का कहना है कि वे भी अमेरिका के साथ किसी अंतिम समझौते पर नहीं पहुंच सके हैं. इस बीच ट्रंप सरकार ने भारत पर 26 फीसदी पारस्परिक टैरिफ (retaliatory tariff) लगाने का ऐलान किया है. ट्रंप ने साफ कर दिया है कि जो देश पहले ही अमेरिका के भेजे ट्रेड लेटर्स पर दस्तखत कर चुके हैं, उन्हें हर हाल में टैरिफ चुकाना होगा.

किस बात पर अटका है भारत-अमेरिका ट्रेड समझौता?

भारत इस डील में अपने टेक्स्टाइल, चमड़ा और जूता उद्योगों के लिए अमेरिकी बाजार में ज्यादा पहुंच चाहता है. दूसरी ओर अमेरिका चाहता है कि भारत अपने कृषि और डेयरी सेक्टर को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोले.

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