अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (2 अप्रैल 2026) को व्हाइट हाउस में आयोजित ईस्टर लंच कार्यक्रम के दौरान एक ऐसा बयान दिया, जिस पर लोगों का ध्यान गया और कुछ जगहों पर हंसी भी सुनाई दी. इस कार्यक्रम में ट्रंप ने पाम संडे का जिक्र करते हुए कहा कि उस दिन यीशु मसीह का स्वागत लोगों ने राजा के रूप में किया था. इसके बाद ट्रंप ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘अब लोग मुझे भी किंग कहते हैं, क्या आप यकीन कर सकते हैं?’
इसी कार्यक्रम में व्हाइट हाउस की आध्यात्मिक सलाहकार पाउला व्हाइट-कैन ने भी ट्रंप को लेकर बयान दिया, जिसने विवाद को और बढ़ा दिया. उन्होंने ट्रंप के जीवन की तुलना यीशु मसीह के जीवन से करते हुए कहा कि जैसे यीशु ने बलिदान और कठिनाइयों का सामना किया, वैसे ही ट्रंप ने भी मुश्किल दौर देखा है. उन्होंने 2024 में ट्रंप पर हुए हमले का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें धोखा दिया गया, उन पर आरोप लगे और उनकी जान को खतरा हुआ. पाउला व्हाइट-कैन ने आगे कहा कि जैसे यीशु अंत में विजयी हुए, वैसे ही ट्रंप भी विजयी होंगे और भगवान उनके साथ है.
BREAKING: Televangelist Paula White compares Trump to Jesus because they were both “betrayed and arrested and falsely accused.”
This person is employed by the White House. pic.twitter.com/wN6HE3kVEJ
— Really American 🇺🇸 (@ReallyAmerican1) April 1, 2026
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर काफी आलोचना शुरू हो गई. कई लोगों ने इन टिप्पणियों को गलत और धार्मिक भावनाओं के खिलाफ बताया. कुछ धार्मिक नेताओं और राजनीतिक लोगों ने भी इसकी आलोचना की. रेवरेंड बेंजामिन केरेमर ने इसे ईश्वर के नाम का गलत इस्तेमाल बताया. डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता मैल्कम केन्याटा ने बाइबिल की पंक्तियां साझा करते हुए कहा कि किसी और को भगवान के समान नहीं माना जाना चाहिए. कई अन्य लोगों ने भी कहा कि इस तरह की तुलना ठीक नहीं है और इससे धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं. कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि कार्यक्रम में मौजूद धार्मिक नेताओं ने इस पर प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी.
अमेरिका में धार्मिक बातों को लेकर बहस
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका में धार्मिक बातों को लेकर पहले भी बहस होती रही है. हाल ही में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के एक बयान पर भी विवाद हुआ था, जिसमें उन्होंने युद्ध को लेकर धार्मिक शब्दों का इस्तेमाल किया था. इसी बीच कैथोलिक चर्च के प्रमुख पोप लियो 14वें ने भी शांति की बात करते हुए कहा कि भगवान युद्ध का समर्थन नहीं करते और हिंसा के लिए की गई प्रार्थनाएं स्वीकार नहीं होतीं.
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