EU के साथ डील होते ही मुनीर के दुलारे की उड़ी नींद, बांग्लादेश-तुर्किए में खौफ का माहौल, जानिए क्यों


भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की चर्चा दुनियाभर में है. EU के साथ एफटीए में भारतीय निर्यात को प्राथमिकता मिलना एक गेम चेंजर है. इस डील से देश के लिए 75 अरब डॉलर (6.41 लाख करोड़ रुपये) के निर्यात के अवसर खुले हैं, जिसमें कपड़ा, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, ज्वैलरी जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में 33 अरब डॉलर के निर्यात को एफटीए के तहत प्राथमिकता मिलने से भारी लाभ होने वाला है. भारत-यूरोपीय यूनियन के इस कदम ने तुर्किए और बांग्लादेश की निंद उड़ा दी है.

भारत-EU डील से बांग्लादेश में खौफ

भारत-यूरोपीय यूनियन के बीच हुए इस डील में सबसे ज्यादा फायदा अपैरल और टेक्‍सटाइल इंडस्‍ट्री को मिलने की उम्मीद है. बांग्लादेश बीते कुछ सालों से इस सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटा हुआ है. यूरोपीय मार्केट से तुर्किए के सामानों के भी बाहर करने में भारतीय एक्‍सपोटर्स को इस डील से काफी मदद मिलने वाली है. बांग्लादेश की कुल एक्सपोर्ट इनकम का 80 से 85 फीसदी कपड़ा उद्योग से आता है. ऐसे में यह डील बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ सकता है.

देश के अपैरल और टेक्‍सटाइल इंडस्‍ट्री का दायरा बढ़ेगा

भारतीय दिग्गज इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट की मानें तो इस डील से देश के अपैरल और टेक्‍सटाइल इंडस्‍ट्री का दायरा बड़े स्तर पर बढ़ेगा. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि यह ऐतिहासिक समझौता भारत के वैश्विक व्यापार में एक महत्वपूर्ण सफलता है और दो प्रमुख लोकतंत्रों और अर्थव्यवस्थाओं के बीच साझेदारी को और मजबूत करता है, जो मिलकर लगभग 25 प्रतिशत वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का योगदान देती हैं. उन्होंने कहा कि अपैरल और टेक्‍सटाइल, चमड़ा और जूते, ज्वैलरी, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग उत्पाद, गाड़ी, कृषि और खाद्य पदार्थ, आईटी और आईटी संबंधित क्षेत्रों में देश को बड़ा फायदा होगा.

यूरोप के मार्केट से गायब हो जाएगा तुर्किए-बांग्लादेश
 
भारत और यूरोपीय एफटीए से यूरोप का मार्केट बिना किसी ड्यूटी के भारतीय कपड़ों के लिए खुल जाएगा. इससे यूरोप के देशों में भारतीय सामान की प्रति प्रतिस्पर्धा बढ़ जाएगी. बांग्लादेश के लिए यूरोप सबसे बड़ा एक्‍सपोर्ट डेस्टिनेशन रहा है. उसके कुल निर्यात में EU की भागीदारी 45 फसदी से 40 फीसदी है. टैरिफ हटने के बाद भारत यूरोपीय मार्केट से बांग्लादेश, तुर्किए और वियतनाम जैसे देशों के साथ प्रतिस्पर्धा करेगा और उन्हें रिप्‍लेस करने की स्थिति में आ सकता है. इससे पाकिस्तान के सीडीएफ आसिम मुनीर के दोनों चहेतों में खौफ का माहौल है.



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