मिडिल में जारी जंग के नौवें दिन अब इजरायल ने ईरान में तेल भंडार और रिफाइनरी फैसिलिटी से जुड़े ठिकानों पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं. ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के भारत में प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने इस जंग के बीच चीन और रूस को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने ये भी कहा कि भारतीयों ने अमेरिकी और इजरायल के इस हमले का विरोध किया है और खामेनेई की हत्या पर श्रद्धांजलि अर्पित की है.
अमेरिका ने 200 बार ईरान पर हमला किया: अब्दुल मजीद
अब्दुल मजीद हकीम ने कहा, ‘ईरान और अमेरिका ने हमारे स्कूल पर हमला किया, जिसमें छोटे बच्चों की मौत हो गई. उनकी कोई नैतिकता नहीं है. उन्होंने 7 मार्च को सिविलियन और तेल-पानी प्रॉसेसिंग यूनिट पर हमला किया. अमेरिका ने 200 बार ईरान पर हमला किया है. क्या अमेरिका न्यूयॉर्क से हमला कर रहा है नहीं, ये हमारे पड़ोसियों के बेस से हमला कर रहा है. हमारे राष्ट्रपति ने कहा भी है कि अगर हमारे पड़ोसी देश अमेरिका को हमला नहीं करने देते तो अमेरिका ईरान पर हमला नहीं कर पाता. हम अपने पड़ोसी देशों पर हमला नहीं कर रहे हैं. हम अमेरिकी बेस पर हमला कर रहे हैं.’
‘हमें 8 साल भी लड़ना पड़े तो लड़ेंगे’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार कह रहे हैं कि वे ईरान में सत्ता परिवर्तन करना चाहते हैं. इसे लेकर अब्दुल मजीद हकीम ने पूछा, ‘क्या किसी देश का राष्ट्रपति कह सकता है कि हम दूसरे देश का लीडर बदल देंगे, ये कितना शर्मनाक है. क्या दुनिया में कोई कानून नहीं है? हम इंसाफ के लिए लड़ते रहेंगे. हम 19 मिलियन लोग हैं, दुनिया में कई देश हैं जो ईरान का समर्थन कर रहे हैं. हम अपने आत्मसम्मान के लिए मरने के लिए तैयार हैं. अगर हमें 8 साल भी लड़ना पड़े तो हम उसके लिए भी तैयार है. हमने ईराक से भी 8 साल लड़ाई लड़ी है. हमारे पास मिसाइल है, हम खुद के लिए लड़ते रहेंगे.’

चीन-रूस साथ देते तो हमारी स्थिति बेहतर होती: हकीम इलाही
डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने इस जंग में रूस और चीन की ओर से दी जाने वाली मदद को लेकर भी तस्वीरें साफ की. उन्होंने कहा, ‘अगर चीन और रूस हमारा समर्थन कर रहे होते तो हमारी स्थिति इससे बेहतर होती. वेस्ट मीडिया काफी फेक न्यूज भी फैलाती है. भारत के लोगों ने अमेरिका और इजरायल के इस हमले का विरोध किया है और खामेनेई की हत्या पर श्रद्धांजलि अर्पित की है. हमारे दुश्मनों में कोई मानवता नहीं है वे सिर्फ पैसे के बारे में और लोगों को मारने के बारे में जानते हैं.’
डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान अपना परमाणु हथियार बनाने के बहुत करीब था और अगर अमरिका उस पर हमला नहीं करता तो तेहरान यूएस और उसके लोगों के लिए खतरा साबित होता. इस पर अब्दुल मजीद हकीम ने कहा, ‘ईरान पहले से ही कहता रहा है कि हम न्यूक्लियर हथियार नहीं चाहते. अगर हम चाहते तो हमारे पास होता. हमारे धर्म के अनुसार ये हराम है. अयातुल्ला अली खामेनेई ने पहले ही कहा था कि हम न्यूक्लियर हथियार नहीं चाहते हैं.’
‘ईरान के पास कोई न्यूक्लियर हथियार नहीं’
उन्होंने कहा, ‘IAEA ने पहले ही कह दिया है कि ईरान के पास कोई न्यूक्लियर हथियार नहीं है. वे (अमेरिका) ईरान के तेल पर अपना कब्जा करना चाहते हैं, वे ईरान के गैस पर, खदानों पर कब्जा करना चाहते हैं. इस बिजनेस में सबसे बड़ा बाजार हथियारों का है, जो इस बिजनेस में हैं उन्हें काफी फायदा हो रहा है. कोई सबूत नहीं है कि ईरान के पास परमाणु हथियार है और न ही होने जा रहा है.’
अब्दुल मजीद हकीम ने कहा, ‘इजरायल अपने पड़ोसियों पर हमला करता है. इस रीजन के सभी देशों पर इजरायल हमला कर चुका है. इजरायलियों ने फिलिस्तिनियों के साथ जानवरों जैसा बर्ताव किया है. हमारे दुश्मनों में कोई मानवता नहीं है, वे सिर्फ पैसे के बारे में और लोगों को मारने के बारे में जानते हैं.’ उन्होंने ये भी कहा कि जब अमेरिका और इजरायल ने हमला किया तो अयातुल्ला अली खामेनेई ने बंकर में जाने से इनकार कर दिया था.
कैसे हुई खामेनेई की मौत?
उन्होंने कहा, ‘हमारे दिवंगत सुप्रीम लीडर खामेनेई ने कहा था अगर आप 19 मिलियन ईरानियों के लिए बंकर बनाएंगे तभी मैं बंकर में जाऊंगा. उन्होंने बंकर में जाने से मना कर दिया. उन्होंने इसके अलावा कहीं और भी जाने से मना कर दिया. उनके चार बेटे हैं किसी के पास भी अपना घर नहीं है. हमारे संविधान के अनुसार सुप्रीम लीडर पर काफी जिम्मेदारियां होती है. अगर किसी कारणों से उनका निधन हो जाता है तो 3 सदस्यों की काउंसिल का गठन होता है. ईरान के लोग स्मार्ट हैं जागरुक हैं, वे अपना लीडर खुद चुन सकते हैं.’
अब्दुल मजीद हकीम ने ईरान की स्थिति साफ करते हुए कहा, ‘हम कभी ये लड़ाई नहीं चाहते थे. अगर हम पर कोई हमला करेगा तो हमें अपनी सीमाओं की सुरक्षा करने का पूरा अधिकार है. हजारों ईरानियों को पिछले हफ्ते मार दिया गया. क्या यूएस के पास लोगों को मारने का अधिकार है, उनके लीडर चुनने का अधिकार है? क्या हमें अपना बचाव करने का भी अधिकार नहीं है? उनके पास ईरान के आसपास 33 बेस हैं. वे यहां क्या कर रहे हैं.’
‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद नहीं है: हकीम इलाही
उन्होंने कहा, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद नहीं किया गया है. अगर ईरान इसे बंद कर देता तो कोई शिप उधर से नहीं गुजर पाता. हमें पता है कि इससे किसी दूसरे देशों को कोई फर्क नहीं पड़ता है. कोई भी इजरायल को नहीं कह रहा है कि युद्ध खत्म करो, लेकिन सभी ईरान को कह रहे हैं कि युद्ध बंद करो. युद्ध तो ईरान और अमेरिका ने शुरू किया है.’ उन्होंने पूछा, ‘क्या उनके पास ईरान का भूगोल बदलने का अधिकार है? क्या उनके पास हमारे तेल संसाधनों पर हमला करने का अधिकार है? क्या उनके पास स्कूलों पर हमला करने का अधिकार है?’