8 अप्रैल 2026 को अमेरिका और ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता में दो हफ्ते का अस्थायी सीजफायर कर लिया. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ने दोनों पक्षों के बीच संदेश पहुंचाए, ‘इस्लामाबाद एक्सॉर्ड’ नाम से दो-चरणीय प्लान पेश किया और 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में बातचीत बुलाई. दुनिया भर के नेता और संगठनों ने इस कूटनीतिक प्रयास की सराहना की. एक्सप्लेनर में जानते हैं कि किन देशों ने पाकिस्तान की पीठ थप-थपाते हुए क्या कहा और इन तारीफों के मायने क्या हैं…
सवाल 1: ब्रिटेन ने पाकिस्तान के बारे में क्या कह दिया?
जवाब: ब्रिटिश हाई कमिश्नर जेन मैरियट ने कहा, ‘इस महत्वपूर्ण युद्धविराम को सुनिश्चित करने के लिए शांत, प्रभावी और कूटनीतिक भूमिका निभाने पर पाकिस्तान का धन्यवाद.’ यूके के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी सीजफायर का स्वागत किया और पाकिस्तान की भूमिका को सराहा, साथ ही होर्मुज स्ट्रेट को स्थायी रूप से खुला रखने के लिए गल्फ देशों से बातचीत करने की योजना बनाई.
सवाल 2: ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की प्रतिक्रिया क्या रही?
जवाब: ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा, ‘हम तनाव कम करने की कोशिशों के लिए पाकिस्तान, मिस्र, तुर्किये और सऊदी अरब समेत सभी मध्यस्थों के प्रयासों का धन्यवाद करते हैं और उनका समर्थन करते हैं.’ न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने कहा, ‘हम इस संकट का समाधान खोजने के लिए पाकिस्तान, तुर्किये और मिस्र जैसे देशों के प्रयासों के शुक्रगुजार हैं.’
सवाल 3: अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने पाकिस्तान की पीठ थापते हुए क्या कहा?
जवाब: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तो सीजफायर के साथ ही पाकिस्तान को क्रेडिट दे दिया था. शायद यह भारत-पाक युद्ध के मिले क्रेडिट का बदला है. ट्रंप ने खुद कहा, ‘मैं इस नतीजे तक पहुंचने में पाकिस्तान की भूमिका की सराहना करना चाहता हूं.’ संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सीजफायर का स्वागत करते हुए पाकिस्तान और अन्य देशों के प्रयासों की सराहना की. यूरोपीय संघ ने भी पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों के लिए धन्यवाद दिया.
सवाल 4: मलेशिया ने पाकिस्तान की तारीफ में क्या कहा?
जवाब: मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने कहा, ‘पाकिस्तान की सभी पक्षों से बिना डर बातचीत की कोशिशें मुस्लिम एकता और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी की सर्वोच्च परंपराओं को दर्शाती हैं.’ उन्होंने पाकिस्तान और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की ‘विदेश नीति और साहसी कूटनीति’ की सराहना की.
सवाल 5: इसके अलावा किन देशों ने पाकिस्तान को हीरो बता दिया?
जवाब: पाकिस्तान को सीजफायर कराने के लिए दुनियाभर के देशों से तारीफें मिल रही हैं…
- सऊदी अरब: विदेश मंत्रालय ने सीजफायर का स्वागत करते हुए पाकिस्तान की बेहतरीन कोशिशों की तारीफ की. बयान में कहा गया कि पाकिस्तान और जनरल आसिम मुनीर की भूमिका से यह समझौता संभव हुआ. सऊदी ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया और पाकिस्तान को धन्यवाद दिया.
- जर्मनी: विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने सीजफायर का स्वागत करते हुए खासतौर पर पाकिस्तान को धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा, ‘थैंक यू पाकिस्तान, फॉर द क्वाइट, इफेक्टिव, डिप्लोमैटिक रोल यू हैव प्लेड इन ब्रिंगिंग अबाउट दिस वाइटल सीजफायर.’ जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ट्ज ने भी पाकिस्तान की मध्यस्थता को ‘टायरलेस एंड करेजियस डिप्लोमेसी’ बताया और कहा कि अब स्थायी शांति के लिए बातचीत जारी रखनी चाहिए.
- चीन: पाकिस्तान की ‘यूनिक एंड इंपॉर्टेंट रोल’ की सराहना की और बैक-चैनल में सहयोग का जिक्र किया.
- पुर्तगाल: साफतौर पर पाकिस्तान की मध्यस्थता के लिए धन्यवाद दिया.
- जापान, इंडोनेशिया और इराक: सीजफायर को ‘पॉजिटिव स्टेप’ बताते हुए पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र और सऊदी अरब की संयुक्त प्रयासों की तारीफ की. इन देशों ने कहा कि पाकिस्तान की भूमिका ने तनाव कम करने में अहम योगदान दिया.
- कजाकिस्तान: राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ की ‘टायरलेस डिप्लोमेसी’ की सराहना की. इसके अलावा भी पाकिस्तान को ‘मुस्लिम एकता और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी’ का उदाहरण बताया. कुल मिलाकर, इन तारीफों से साफ है कि पाकिस्तान ने इस बार न सिर्फ अमेरिका-ईरान के बीच पुल का काम किया, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी कूटनीतिक साख मजबूत की.
सवाल 6: कुल मिलाकर इस तारीफ का मतलब क्या है?
जवाब: यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने मुश्किल समय में मध्यस्थता की, लेकिन इस बार अमेरिका और ईरान जैसे बड़े खिलाड़ियों के बीच सीजफायर कराने में उसकी भूमिका को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिल ही गई. कई देशों ने इसे ‘शांत, प्रभावी और साहसी’ बताया. अब 11 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत से उम्मीद है कि यह दो हफ्ते का सीजफायर स्थायी शांति में बदल सके.
हालांकि, दोनों पक्ष अभी भी अपने-अपने दावे कर रहे हैं. अमेरिका इसे अपनी सफलता बता रहा है तो ईरान इसे अपनी जीत. पाकिस्तान की इस कोशिश से क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था (खासकर तेल आपूर्ति) को कुछ राहत मिली है, लेकिन असली चुनौती अब स्थायी समझौते की है.