यूरोपीयन यूनियन (European Union, EU) के साथ मदर ऑफ ऑल डील्स साइन होने के बाद भारत का फोकस अमेरिका पर आ गया है. विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार उम्मीद है कि लंबे समय से अटकी इंडिया-यूएस ट्रेड डील पर जल्दी ही मुहर लग सकती है. उन्होंने बताया है कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में ‘बहुत महत्वपूर्ण’ प्रगति हुई है और दोनों पक्ष इसको अंतिम रूप देने के करीब हैं.
बुधवार (28 जनवरी, 2026) को सूत्रों ने कहा कि यूरोपीय संघ के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम चरण में पहुंचाने के दौरान भी भारत ने अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखी थी. सूत्रों ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए को अमेरिका के साथ व्यापार संबंधों की मौजूदा स्थिति के विकल्प के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार भी उतना ही अहम है.
एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत में ‘बहुत महत्वपूर्ण’ प्रगति हुई है और दोनों पक्ष सकारात्मक नतीजे की उम्मीद कर रहे हैं. एक सूत्र ने कहा, ‘इस दिशा में कोशिश चल रही है. हम आशा करते हैं कि बातचीत के सकारात्मक परिणाम आएंगे.’ उनका कहना है कि अब बस तकनीकी काम ही बचा है, सिर्फ औपचारिकताओं को पूरा करना बाकी है.
यह खबर ऐसे समय पर सामने आई है, जब भारत को उम्मीद है कि टैरिफ को लेकर कुछ राहत मिल सकती है. भारत और अमेरिका ने पिछले साल द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर कई दौर की बातचीत की थी, लेकिन टैरिफ लागू होने के बाद इसमें बाधा आ गई. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त में भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत लगाया था. इसमें रूसी तेल खरीदने के लिए 25 प्रतिशत पेनल्टी भी शामिल है. इमीग्रेशन और अन्य मुद्दों पर भी दोनों देशों के संबंधों में तनाव देखा गया.
भारत और ईयू के बीच एफटीए संपन्न होने के बाद यह धारणा बनी है कि यह अमेरिका की शुल्क नीति के जवाब में उठाया गया कदम है. हालांकि सूत्रों ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यह समझौता दोनों पक्षों के आपसी हित और लाभ के आधार पर किया गया है. सूत्रों ने कहा कि भारत अमेरिका और यूरोप दोनों को निर्यात बढ़ाना चाहता है, ताकि रोजगार बढे़ और विनिर्माण को भी बढ़ावा मिल सके.
भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इससे पहले कहा था कि बीटीए के पहले पड़ाव की घोषणा जल्द ही कर दी जाएगी. हालांकि, उन्होंने इसे लेकर कोई तारीख या समय नहीं बताया था. बीटीए का मकसद भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को 2030 तक 191 अरब डॉलर से 500 अरब डॉलर तक ले जाने का है.