India-US Trade Deal: US सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भारत को राहत, 18 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ बेअसर! नई ट्रेड डील पर बन सकती है बात


अमेरिका की तरफ से भारत पर लगाए जाने वाले 18 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ अब बेअसर हो सकते हैं. हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला दिया है, जिसके बाद नई टैरिफ व्यवस्था लागू हो गई है. अब दोनों देश एक नए अंतरिम व्यापार समझौते (BTA) पर काम कर रहे हैं, जो दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है.

पहले भारत पर 25 फीसदी टैरिफ था, जिसे घटाकर 18 फीसदी करने की बात हुई थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने IEEPA कानून के तहत लगाए गए टैरिफ को गलत बताया. इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 15 फीसदी का समान ग्लोबल टैरिफ लागू करने की घोषणा की. अब यही नई व्यवस्था मानी जा रही है.

15 फीसदी + MFN का मतलब

अब 15 फीसदी टैरिफ, पहले से लागू ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ (MFN) दर के ऊपर लगेगा. MFN वह दर है जो सभी देशों पर बराबर लागू होती है. अगर सभी देशों पर 15 फीसदी ही लगेगा, तो भारत पर अलग से 18 फीसदी लगाने का सवाल नहीं बनता. यह 15 फीसदी टैरिफ फिलहाल 150 दिनों के लिए अस्थायी तौर पर लागू है. आगे इसे जारी रखने के लिए अमेरिका की संसद की मंजूरी जरूरी होगी.

किन क्षेत्रों को राहत?

डेलॉइट इंडिया के विशेषज्ञों के अनुसार के अनुसार इस फैसले से रत्न-आभूषण, कपड़ा, कुछ ऑटो पार्ट्स और इंजीनियरिंग सामान को राहत मिलेगी. हालांकि स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर पर सेक्शन 232 राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर 50% टैरिफ पहले की तरह लागू रहेंगे.

व्यापार समझौते की दिशा

फरवरी में दोनों देशों ने कहा था कि अगर टैरिफ में बदलाव होगा तो समझौते की शर्तें भी बदली जा सकती हैं. अब नई स्थिति को देखते हुए समझौते में बदलाव संभव है. उद्योग संगठनों का कहना है कि जल्द साफ तस्वीर सामने आनी चाहिए, क्योंकि अमेरिका भारत का बड़ा निर्यात बाजार है.

BTA के अन्य पहलू बरकरार

अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) में सिर्फ रेसिप्रोकल टैरिफ ही नहीं, बल्कि रूस से जुड़े पेनल्टी प्रावधान, सेक्शन 232 उत्पादों पर कोटा आधारित रियायतें और गैर-टैरिफ बाधाएं भी शामिल थीं. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से रेसिप्रोकल टैरिफ अप्रभावी हो सकते हैं, लेकिन बाकी प्रावधान लागू रहेंगे.

आगे क्या?

फिलहाल 15 फीसदी टैरिफ नई हकीकत है, लेकिन यह अस्थायी है. आने वाले समय में बातचीत से तय होगा कि भारत-अमेरिका व्यापार संबंध किस दिशा में जाएंगे.



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