Iran-US Ceasefire: अमेरिका-ईरान जंग के सीजफायर से भारत को होगा बड़ा फायदा! इंडिया की टेंशन कैसे होगी खत्म, जानें


अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर हालात धीरे-धीरे सामान्य होने की उम्मीद है. एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्तों के युद्ध विराम का ऐलान किया है, वहीं ईरान ने भी इस दौरान होर्मुज जलमार्ग को खोलने पर सहमति जताई है. इससे भारत के लिए राहत की खबर सामने आई है, क्योंकि पश्चिम एशिया में तनाव के कारण देश में ईंधन की सप्लाई प्रभावित हो रही थी.

ट्रंप ने बताया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर से बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया. उन्होंने कहा कि उनसे ईरान पर बड़े हमले को रोकने की अपील की गई थी. साथ ही ईरान की तरफ से होर्मुज को सुरक्षित तरीके से खोलने की बात को देखते हुए उन्होंने दो हफ्तों तक बमबारी और हमले रोकने का फैसला किया.

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची

ईरान भी इस सीजफायर के लिए तैयार हो गया है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनकी शर्तों को मान लिया गया है और अगले दो हफ्तों तक जहाजों को होर्मुज से सुरक्षित गुजरने दिया जाएगा. यह काम ईरानी सेना के साथ तालमेल से किया जाएगा. जब युद्ध शुरू हुआ था तब ईरान ने होर्मुज जलमार्ग को बंद कर दिया था. इसका सीधा असर भारत पर पड़ा, क्योंकि भारत का करीब 40 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत से ज्यादा एलएनजी और लगभग 90 प्रतिशत एलपीजी इसी रास्ते से आता है. हालांकि बाद में ईरान ने भारत समेत कुछ देशों को मित्र बताते हुए इस रास्ते से गुजरने की अनुमति दे दी थी. इसमें भारत के अलावा चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान भी शामिल थे.

भारत की ओर आ रहे 2 एलपीजी टैंकर

फिलहाल खबर है कि भारतीय झंडे वाले दो एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज पारकर भारत की ओर आ रहे हैं, जबकि 16 अन्य जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं. इनमें एलएनजी जहाज, एलपीजी टैंकर, कच्चा तेल ले जाने वाले जहाज, कंटेनर पोत और अन्य मालवाहक जहाज शामिल हैं. सरकारी अधिकारी के अनुसार, 46,650 टन एलपीजी लेकर ‘ग्रीन सानवी’ टैंकर 7 अप्रैल को भारत पहुंचेगा, जबकि 15,500 टन गैस के साथ ‘ग्रीन आशा’ टैंकर 9 अप्रैल को भारतीय तट पर पहुंचेगा.

भारत को कितना तेल आयात होता है?

भारत अपनी जरूरत का करीब 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है और इसमें से लगभग 90 प्रतिशत सप्लाई पश्चिम एशिया से होती है. ऐसे में इन टैंकरों के आने और होर्मुज के खुलने से देश में गैस की सप्लाई बेहतर होने की उम्मीद है. अब जब दो हफ्तों के लिए यह जलमार्ग खुलने जा रहा है तो भारत आने वाले जहाजों की संख्या बढ़ सकती है और ईंधन की कमी का दबाव कम हो सकता है.

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