ईरान और अमेरिका के बीच गुरुवार (26 फरवरी) को बातचीत हुई. वार्ता की मध्यस्थता कर रहे ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी ने सोशल मीडिया पर बताया कि दोनों पक्षों के बीच महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और अगले सप्ताह वियना में तकनीकी टीमों के साथ बातचीत का एक और दौर आयोजित किया जाएगा.
सूत्रों से जानकारी मिल रही है कि ईरान और अमेरिका के बीच गुरुवार को हुई उच्च-स्तरीय और अहम वार्ताएं बिना किसी स्पष्ट नतीजे के समाप्त हो गईं. न तो परमाणु समझौते पर कोई बड़ी सफलता मिली और न ही कूटनीति में ऐसा कोई गतिरोध आया, जिससे अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई की आशंका पैदा होती. बातचीत का ब्योरा अभी स्पष्ट नहीं है.
यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) क्या है?
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में एक बड़ा विवाद का मुद्दा यह है कि क्या तेहरान (ईरान) अपना परमाणु संवर्धन कार्यक्रम बनाए रखेगा? ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यह उनकी कड़ी मेहनत से हासिल किया गया राष्ट्रीय अधिकार है. यूरेनियम को संवर्धित करना एक बेहद जटिल प्रक्रिया है, जिसमें दुनिया के 15 से भी कम देशों को महारत हासिल है.
संवर्धन की प्रक्रिया में यूरेनियम के एक दुर्लभ आइसोटोप U-235 को अलग करके उसका कंसंट्रेशन बढ़ाया जाता है, जिससे परमाणु विखंडन (न्यूक्लियर फिशन) संभव हो पाता है. यह प्रक्रिया तेज़ी से घूमने वाले सिलेंडरों, जिन्हें सेंट्रीफ्यूज कहा जाता है, उनके माध्यम से की जाती है. कम स्तर पर संवर्धित यूरेनियम का उपयोग बिजली संयंत्रों में किया जा सकता है, जबकि लगभग 90 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है.
क्या बोले ईरानी अधिकारी
ईरानी सरकार के सूचना परिषद के प्रमुख एलियास हज़्राती ने कहा कि गंभीर वार्ता हुई है और अब तकनीकी विवरणों के चरण में प्रवेश कर चुकी है. कुछ मीडिया में चल रही खबरें बातचीत की वास्तविकता को सही तरीके से नहीं दर्शातीं. ईरान की राष्ट्रीय जरूरतों के अनुसार यूरेनियम संवर्धन जारी रहेगा और प्रतिबंधों में राहत ईरान की प्रमुख मांग बनी हुई है.
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