<p style="text-align: justify;"><a href="https://www.abplive.com/news/india/iran-indicated-indian-ships-may-be-allowed-to-pass-through-strait-of-hormuz-while-other-will-remain-banned-says-esmail-baghaei-3102470" target="_blank" rel="noopener">ईरान</a> और <a href="https://www.abplive.com/news/world/us-israel-iran-war-irgc-said-will-target-energy-infrastructure-in-middle-east-3100690" target="_blank" rel="noopener">अमेरिका-इजरायल</a> के बीच जारी वॉर के बीच ईरान को अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिल रहा है. इसको लेकर ईरान की सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी ने दुनियाभर के मुसलमानों और इस्लामी देशों की सरकारों को एक ओपन लेटर लिखा है. लेटर में लारीजानी ने कहा कि ज्यादातर इस्लामी देशों ने केवल बयान दिए, लेकिन ईरान के साथ मजबूती से खड़े नहीं हुए हैं. उन्होंने इसे निराशाजनक बताते हुए कहा कि ईरान को जिस एकजुट समर्थन की उम्मीद थी, वह नहीं मिला.</p>
<p style="text-align: justify;">Iran Int की रिपोर्ट के मुताबिक लारीजानी ने लेटर में आरोप लगाया कि अमेरिका-इजरायल ने बातचीत के दौरान धोखे से ईरान पर हमला किया, जिसका मकसद उसे कमजोर करना था. उन्होंने कहा कि इस हमले में कई सैन्य कमांडर और नागरिक मारे गए, लेकिन ईरानी जनता ने मजबूत प्रतिरोध दिखाया.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इस्लामी एकता की अपील</strong></p>
<p style="text-align: justify;">लेटर में उन्होंने इस्लामी देशों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि अगर इस्लामी उम्मा (मुस्लिम समुदाय) एकजुट हो जाए तो वह सुरक्षा, प्रगति और स्वतंत्रता सुनिश्चित कर सकती है. उन्होंने पैगंबर मोहम्मद की शिक्षा का हवाला देते हुए कहा कि अगर कोई मुसलमान मदद की पुकार सुने और मदद न करे तो वह सच्चा मुसलमान नहीं है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कुछ देशों पर निशाना</strong></p>
<p style="text-align: justify;">लारीजानी ने उन देशों की भी आलोचना की जिन्होंने ईरान की कार्रवाई को खिलाफ बताया. उन्होंने कहा कि अगर उन देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों से ईरान पर हमले होते हैं तो ईरान के जवाब को गलत नहीं ठहराया जा सकता.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>किस पक्ष में खड़े होंगे?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">लेटर में उन्होंने सीधा सवाल उठाया आज मुकाबला एक तरफ अमेरिका और इजरायल का है और दूसरी तरफ ईरान प्रतिरोध की ताकतों का है. ऐसे में इस्लामी देश किस पक्ष में खड़े होंगे? ईरान ने आखिर में खुद को अन्य देशों का शुभचिंतक बताते हुए कहा कि उसका मकसद किसी पर प्रभुत्व स्थापित करना नहीं, बल्कि क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देना है. </p>
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Iran-US War: '…तो वह सच्चा मुसलमान नहीं…',मुस्लिम देशों को ईरान ने भेजा ओपन लेटर, पैगंबर मोहम्मद का मैसेज भी दिया