मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिक ईरान के पहाड़ी इलाके में करीब 48 घंटे तक छिपा रहा. उसके पास सिर्फ एक पिस्टल, लोकेशन बताने वाला उपकरण था. हालांकि, उसे उम्मीद थी कि उसे समय रहते बचा लिया जाएगा. सैनिकों को बचाने की कार्रवाई शुरू हुई तो यह एक बड़ा और खतरनाक ऑपरेशन था. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मिशन की जानकारी देते हुए कहा, “WE GOT HIM!”, यानी हमने उसे सुरक्षित निकाल लिया है. उन्होंने बताया कि लापता सैनिक अब पूरी तरह सुरक्षित है.
यह सैनिक F-15E फाइटर जेट का क्रू मेंबर था, जिसे ईरान ने मार गिराया था. विमान से बाहर निकलने के बाद पायलट को जल्दी बचा लिया गया था, लेकिन दूसरा अधिकारी पहाड़ी इलाके में लापता हो गया था. इसके बाद उसे ढूंढने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया गया. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह सैनिक लगभग दो दिन तक दुश्मन इलाके में छिपा रहा. इस दौरान ईरानी सुरक्षाबल लगातार उसकी तलाश कर रहे थे. ट्रंप ने कहा कि वह सैनिक बेहद मुश्किल हालात में था और दुश्मन उसके करीब पहुंच रहे थे.
IRGC PR: A U.S. enemy #aircraft searching for the downed fighter pilot was destroyed in southern Isfahan. Further details to follow.#Iran #IRGC #BreakingNews #Pilot #War pic.twitter.com/UeJWSDPbJo
— Consulate General of the I.R. Iran in Mumbai (@IRANinMumbai) April 5, 2026
विमान से बाहर सैनिका ऊंचे जगह पर चला गया
विमान से बाहर निकलने के बाद वह ऊंचे इलाके में चला गया और वहीं छिपा रहा. उसके पास एक पिस्टल थी और उसने अपनी लोकेशन बताने के लिए बीकन, जीपीएस का इस्तेमाल किया. दूसरी ओर ईरानी सुरक्षाबल इलाके में तलाशी कर रहे थे. खबरों के अनुसार, उन्होंने स्थानीय लोगों से भी मदद मांगी और जानकारी देने पर इनाम की बात भी कही गई. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि जिस इलाके में विमान गिरा, वहां सरकार के खिलाफ माहौल भी है, इसलिए संभव है कि उस सैनिक को छिपने में किसी ने मदद की हो. इस बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसियां भी अलग-अलग तरीकों से उसे बचाने की कोशिश कर रही थीं. यह एक तरह की दौड़ थी, जिसमें अमेरिकी सेना उस सैनिक तक पहुंचना चाहती थी, उससे पहले कि ईरानी बल उसे पकड़ लेते. 48 घंटे तक यह मिशन सबसे बड़ी प्राथमिकता बना रहा.
🚨“WE GOT HIM! My fellow Americans, over the past several hours, the United States Military pulled off one of the most daring Search and Rescue Operations in U.S. History, for one of our incredible Crew Office Members, who also happens to be a highly respected Colonel, and who I… pic.twitter.com/FNPWV6MPvA
— The White House (@WhiteHouse) April 5, 2026
ऑपरेशन में कौन था शामिल?
इस ऑपरेशन में सैकड़ों कमांडो, कई विमान और हेलीकॉप्टर लगाए गए. साथ ही साइबर, अंतरिक्ष और खुफिया तंत्र की भी मदद ली गई. एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने इसे अब तक के सबसे कठिन और जटिल ऑपरेशनों में से एक बताया. बचाव अभियान रात के अंधेरे में शुरू किया गया. ट्रंप के आदेश पर कई लड़ाकू विमान भेजे गए, जिन्होंने ईरानी काफिलों पर हमला किया ताकि वे सैनिक तक न पहुंच सकें. जब अमेरिकी टीम वहां पहुंची तो वहां गोलीबारी भी हुई, लेकिन इसके बावजूद वह सैनिक अपनी जगह पर डटा रहा, जब तक कि कमांडो उसे निकाल नहीं ले गए. वह घायल हुआ है, लेकिन उसके ठीक होने की उम्मीद है.
अमेरिकी हेलीकॉप्टर पर हमला
इस मिशन के दौरान एक अमेरिकी हेलीकॉप्टर पर भी हमला हुआ, जिसमें कुछ लोग घायल हो गए, लेकिन हेलीकॉप्टर सुरक्षित उतर गया. एक A-10 विमान को भी नुकसान पहुंचा और उसके पायलट को बाहर निकलना पड़ा, जिसे बाद में बचा लिया गया. सैनिक को जब निकाल लिया गया तब भी मुश्किलें खत्म नहीं हुईं. दो ट्रांसपोर्ट विमान खराब हो गए, जिससे योजना बदलनी पड़ी. बाद में तीन और विमान भेजे गए और खराब विमानों को वहीं नष्ट कर दिया गया ताकि वे दुश्मन के हाथ न लगें.
ऑपरेशन में शामिल सभी कमांडो सुरक्षित लौटे
इस ऑपरेशन में शामिल सभी कमांडो सुरक्षित लौट आए और घायल सैनिक को इलाज के लिए कुवैत ले जाया गया. ट्रंप ने यह भी बताया कि एक दिन पहले एक और अमेरिकी पायलट को बचाया गया था, लेकिन उस समय यह जानकारी छिपाई गई थी ताकि दूसरा ऑपरेशन प्रभावित न हो. उन्होंने कहा कि पहली बार ऐसा हुआ है जब दुश्मन इलाके के अंदर से दो अमेरिकी सैनिकों को अलग-अलग बचाया गया. ट्रंप ने कहा कि इस ऑपरेशन से यह साबित होता है कि अमेरिका की सैन्य ताकत बहुत मजबूत है. उन्होंने कहा कि हम अपने किसी भी सैनिक को पीछे नहीं छोड़ते.