Israel Al Aqsa Mosque: रमजान के दौरान 16 दिनों से बंद है अल-अक्सा मस्जिद, इजरायल के फैसले पर गुस्से में मुस्लिम देश


ईरान के साथ जंग के बीच इजरायल ने मुसलमानों की सबसे पवित्र मस्जिदों में से एक अल-अक्सा मस्जिद को पिछले 16 दिनों से बंद कर रखा है. रमजान के महीने में इस फैसले को लेकर दुनिया के कई मुस्लिम देशों में नाराजगी जाहिर की है. अरब देशों के संगठन अरब लीग ने रविवार (15 मार्च 2026) को इजरायल के इस फैसले की कड़ी निंदा की. संगठन ने कहा कि इजरायल को मुसलमानों को मस्जिद में इबादत करने से रोकने का कोई अधिकार नहीं है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है.

Middle East Eye की रिपोर्ट के मुताबिक अरब लीग ने बयान में कहा कि इस तरह की कार्रवाई क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और सुरक्षा पर गंभीर असर डाल सकती है. साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की गई कि वे यरूशलम के पवित्र स्थलों पर कथित अवैध कार्रवाइयों को रोकने के लिए इजरायल पर दबाव डालें.

1967 के बाद रमजान में सबसे लंबी बंदी

इजरायल ने ऐसे वक्त पर फैसला लिया है, जब 28 फरवरी को शुरू हुए ईरान युद्ध के बाद से इजरायल ने कब्जे वाले पूर्वी यरुशलम में स्थित अल-अक्सा मस्जिद को बंद कर दिया है. फिलिस्तीनी अधिकारियों के अनुसार यह बंदी 1967 में पूर्वी यरुशलम पर इजरायल के कब्जे के बाद रमजान के दौरान सबसे लंबी बंदी मानी जा रही है. वहीं कब्जे वाले वेस्ट बैंक में स्थित इब्राहिमी मस्जिद में भी केवल करीब 50 नमाजियों को ही इबादत करने की अनुमति दी जा रही है.

इजरायल ने सुरक्षा कारणों का दिया हवाला

इजरायल का कहना है कि क्षेत्रीय युद्ध और सुरक्षा खतरे के कारण यह कदम उठाया गया है. उसके अनुसार ईरान की ओर से मिसाइल हमलों का खतरा बना हुआ है. मस्जिद बंद होने के कारण अल-अक्सा परिसर लगभग खाली पड़ा है. हजारों फिलिस्तीनी मुसलमानों को पुराने शहर की सड़कों और दीवारों के पास ही नमाज पढ़नी पड़ रही है. रमजान के आखिरी दस दिनों में मस्जिद बंद रहने से लैलतुल कद्र और इतिकाफ जैसी महत्वपूर्ण इबादतें भी प्रभावित हुई हैं.

कई देशों और संगठनों ने की निंदा

अरब लीग के अलावा कई मुस्लिम देशों और संगठनों ने भी इस कदम की आलोचना की है. इस्लामिक संगठन, मुस्लिम विश्व लीग, अल-अज़हर, अफ्रीकी संघ और अरब लीग ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया है. फिलिस्तीनी अथॉरिटी ने इसे 1967 के बाद की सबसे लंबी बंदी बताया है, जबकि हमास ने इसे युद्ध की घोषणा जैसा कदम करार दिया है.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *