Nizamabad Police: ‘हमारे शहर में आना है तो लेनी पड़ेगी इजाजत’, महिला पुलिस अधिकारी के बयान पर बवाल


तेलंगाना के निज़ामाबाद शहर में  महिला पुलिस अधिकारी का एक बयान अब सोशल मीडिया पर तूफान मचा रहा है. वीडियो में अधिकारी साफ तौर पर कह रही हैं, ‘हमारे शहर में आना है तो अनुमति लेकर आना.’ यह घटना 15-16 फरवरी 2026 की रात को हुई, जब कुछ लोग शहर में घूम रहे थे और पुलिस ने उन्हें रोका. इस बयान ने लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है, क्योंकि यह सवाल उठा रहा है कि क्या अब किसी शहर में घुसने के लिए वीजा जैसी अनुमति जरूरी हो गई है?

यह मामला तब सामने आया जब एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें निज़ामाबाद पुलिस की एक महिला अधिकारी कुछ युवकों या ब्लॉगर्स से बात कर रही थीं. अधिकारी ने स्पष्ट कहा कि शहर में प्रवेश या रात के समय घूमने-फिरने के लिए पुलिस से पहले अनुमति लेनी होगी. वीडियो में पुलिस का रवैया कुछ लोगों को अहंकारी लगा, जिसके बाद कई यूजर्स ने इसे वीजा जारी करने जैसा तंज कसा. तेलंगाना पुलिस के डीजीपी से तत्काल कार्रवाई की मांग भी उठी है.

नगर निकाय चुनावों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था

निज़ामाबाद हाल ही में नगर निकाय चुनावों का गवाह रहा है. 11 फरवरी 2026 में हुए इन चुनावों के दौरान पुलिस ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी. कई जगहों पर प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए. राजनीतिक दलों के बीच तनाव रहा और कुछ नेताओं को नगर निगम परिसर में प्रवेश से रोका गया. कांग्रेस और एआईएमआईएम के गठजोड़ से निज़ामाबाद मेयर का पद जीता गया, जबकि बीजेपी ने करीमनगर पर कब्जा किया. चुनाव के समय पुलिस ने संवेदनशील बूथों पर वेबकास्टिंग और चेकपोस्ट लगाए थे ताकि कोई गड़बड़ी न हो. शायद इसी सुरक्षा के मद्देनजर कुछ स्थानीय नियमों का हवाला दिया जा रहा है, लेकिन सामान्य नागरिकों के लिए शहर में प्रवेश पर अनुमति की बात असामान्य लग रही है.

अनुच्छेद 19 के तहत मिलने वाली स्वतंत्रता पर सवाल

पुलिस का यह बयान संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिलने वाली स्वतंत्रता पर सवाल खड़े कर रहा है, जहां देश में कहीं भी घूमने-फिरने का अधिकार है, बशर्ते कोई कानूनी पाबंदी न हो. हालांकि, कुछ लोग मानते हैं कि रात के समय रील्स बनाने या निजता भंग करने वाले मामलों में पुलिस सतर्क रहती है. फिर भी, सामान्य लोगों के लिए ऐसा बयान चौंकाने वाला है. अभी तक तेलंगाना पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है. डीजीपी कार्यालय से इस पर त्वरित जांच और कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है ताकि जनता का विश्वास पुलिस पर बना रहे. यह घटना बताती है कि पुलिस और जनता के बीच संवाद कितना जरूरी है. अगर कोई नियम है तो उसे साफ-साफ समझाया जाना चाहिए, न कि ऐसे बयानों से विवाद बढ़ाया जाए. उम्मीद है कि जल्द ही इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट होगी और नागरिकों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे.



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