Oil Crisis: पाकिस्तान के बाद अब इस देश में तेल का संकट, सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतें 25% बढ़ाईं


अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति चरमरा गई है. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है तो गैस की कमी का संकट पैदा हुआ है. मिडिल ईस्ट संकट के बीच श्रीलंका में पेट्रोल-डीजल के दाम 25 प्रतिशत तक बढ़ा दिए गए हैं. लोगों से ईंधन का इस्तेमाल सीमित और बेहद सोच समझकर करने की अपील की गई है.

सरकार को 20 अरब रुपये का नुकसान

कैबिनेट प्रवक्ता मंत्री नलिंदा जयतिस्सा ने बताया कि मौजूदा दरों पर ईंधन की बिक्री से सरकार को हर महीने 20 अरब रुपये का नुकसान हो रहा है. उन्होंने बताया कि सरकार को एक लीटर डीजल पर 100 रुपये और एक लीटर पेट्रोल पर 20 रुपये का नुकसान हो रहा है.

कितने बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम

सीलोन पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने लंका ऑटो डीजल की कीमत में 79 रुपये बढ़ाकर इसे 382 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, सुपर डीजल की कीमत में 90 रुपये की वृद्धि करके इसे 443 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जबकि ऑक्टेन 95 पेट्रोल की कीमत में 90 रुपये की वृद्धि करके इसे 455 रुपये प्रति लीटर और ऑक्टेन 92 पेट्रोल की कीमत में 81 रुपये की वृद्धि करके इसे 398 रुपये प्रति लीटर कर दिया है.

एक सप्ताह में दूसरी बार बढ़ीं कीमतें

बता दें कि श्रीलंका में बीते एक सप्ताह के भीतर ही दूसरी बार पेट्रोल-डीजल के दाम में इजाफा किया गया है. दो बार कीमतों में बढ़ोतरी के बाद ईंधन के दाम 2022 के आर्थिक संकट के स्तर तक पहुंचने वाले हैं.

सरकार ने ईंधन बचत की अपील की

श्रीलंका सरकार ने जनता से वैश्विक तेल बाजारों में अस्थिरता के बीच संभावित कमी से निपटने के लिए ईंधन और बिजली का सीमित व सोच-समझकर उपयोग करने की अपील की. यह अपील ऐसे समय आई है जब द्वीपीय देश ने आधी रात से ईंधन के खुदरा दाम बढ़ा दिए हैं, जो एक सप्ताह में दूसरी बढ़ोतरी है. ऊर्जा बचत के उपाय के तौर पर सरकार ने प्रत्येक वाहन के लिए जारी क्यूआर कोड के आधार पर ईंधन की बिक्री निश्चित मात्रा में शुरू कर दी है.

श्रीलंका सरकार के प्रवक्ता और मंत्री नलिंदा जयतिस्सा ने कहा कि हालिया मूल्य वृद्धि के बावजूद सरकार डीजल पर 100 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल पर 20 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी देकर हर महीने 20 अरब रुपये का खर्च उठा रही है. मंत्री ने कहा कि अगर ईंधन कीमतों में संशोधन नहीं किया जाता, तो सरकार पर लगभग 1.5 अरब डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ता.



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