पाकिस्तान और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के बीच लंबे समय से लगाए जा रहे संबंधों के आरोपों को एक बार फिर सबूत मिला है. लश्कर के डिप्टी चीफ और पहलगाम आतंकी हमले के कथित मास्टरमाइंड सैफुल्लाह कसूरी ने खुले मंच से पाकिस्तान सेना के साथ अपने करीबी रिश्तों को स्वीकार किया है. एक सामने आए वीडियो में कसूरी ने दावा किया कि उसे पाकिस्तान सेना नियमित रूप से अपने कार्यक्रमों में बुलाती है और यहां तक कि सैनिकों की अंतिम संस्कार की नमाज पढ़ाने के लिए भी आमंत्रित करती है.
यह बयान कसूरी ने पाकिस्तान के एक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बच्चों को संबोधित करते हुए दिया. वीडियो में वह यह कहते हुए नजर आता है कि पाकिस्तान सेना उसे औपचारिक निमंत्रण भेजती है. उसके इस बयान ने पाकिस्तान सरकार के उन दावों की पोल खोल दी है, जिनमें वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की बात करती रही है.
🚨🇵🇰👹 Osint Alert:
Straight from the horse’s mouth.
Pahalgam mastermind and Lashkar-e-Taiba Deputy Chief Saifullah Kasuri openly claims that the Pakistan Army invites him to lead funeral prayers of its own soldiers. He boasts that India is rattled and fearful of his presence.… https://t.co/4CDcKPXY8i pic.twitter.com/wnI9gbWiUQ
— OsintTV 📺 (@OsintTV) January 10, 2026
भारत को दी धमकी, ऑपरेशन सिंदूर पर टिप्पणी
सैफुल्लाह कसूरी ने भारत को लेकर भी भड़काऊ बयान दिए. उसने दावा किया कि भारत उससे डरा हुआ है. इससे पहले भी वह भारत के ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विवादित बयान दे चुका है. कसूरी ने स्वीकार किया कि इस ऑपरेशन में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों को नुकसान पहुंचा, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि भारत ने गलती की है. उसने दोहराया कि लश्कर-ए-तैयबा कश्मीर को लेकर अपने एजेंडे से पीछे नहीं हटेगा.
पहलगाम आतंकी हमले को लेकर घमंड
एक अन्य रैली में कसूरी ने खुद को पहलगाम आतंकी हमले का मास्टरमाइंड बताए जाने पर गर्व जताया था. उसने कहा था कि इस आरोप के बाद उसका नाम दुनिया भर में मशहूर हो गया है. गौरतलब है कि 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत हुई थी.
ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि
पहलगाम हमले के जवाब में भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसके तहत पाकिस्तान और पीओके में स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया. इसके बाद दोनों देशों के बीच चार दिनों तक ड्रोन और मिसाइल हमले हुए. आखिरकार 10 मई को भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष रोकने को लेकर सहमति बनी.
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