US Iran Peace Talks In Pakistan: अमेरिका-ईरान के बीच क्यों आसान नहीं समझौता, पाकिस्तान के पूर्व हाई कमिश्नर अब्दुल बासित ने दिया जवाब


अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में चल रही शांति वार्ता को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. पाकिस्तान के पूर्व हाई कमिश्नर अब्दुल बासित ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता आसान नहीं है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश में हैं. दूसरी ओर ईरान भी अपनी शर्तों पर फिलहाल अड़ा है. इस मसले पर अब्दुल बासित ने एबीपी न्यूज से बातचीत में कही है.

अब्दुल बासित ने से पूछा गया कि शांति वार्ता से पहले ईरान की तरफ से कई तरह की शर्तें अमेरिका के सामने रखी जा रही हैं, अमेरिका उनको मानने के लिए तैयार नहीं है, तो ऐसे में बातचीत सही दिशा में कैसे आगे बढ़ेगी. इस पर बासित ने कहा, ‘जब भी कोई समझौता या एग्रीमेंट होता है, तो उसके लिए लचीलापन दिखाना पड़ता है. ऐसे में हम यही उम्मीद करते हैं कि जब दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद में आ गए हैं, और एक प्रक्रिया शुरू हो गई है तो अब उसके कुछ अच्छे नतीजे भी निकलेंगे.’

पाकिस्तान भी रास्ता निकालने की करेगा पूरी कोशिश – बासित

उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान अपनी भरपूर कोशिश करेगा कि कोई रास्ता निकाले. जो ईरान के दस सूत्र हैं और अमेरिका के 15 सूत्र हैं. ऐसे में उम्मीद है कि कोई बीच का रास्ता निकाले. ताकि दुनिया जो परेशानी में है कि जंग कहीं दोबारा शुरू न हो जाए, तो कम से कम उससे बचा जाए. हालांकि, वार्ता को लेकर स्पष्ट रूप से कुछ भी नहीं कहा जा सकता है.’ 

पाकिस्तान की भूमिका वार्ता को सकारात्मक दिशा में ले जाना

इसके अलावा उन्होंने कहा है कि कोई जमानत तो नहीं दे सकता कि क्या होगा, लेकिन पाकिस्तान का मध्यस्थता का तजुर्बा रहा है. ऐसे में इस मुद्दे को कैसे आगे लेकर जाया जाए, यह मसला नहीं है. असल मसला ये है कि  दोनों पक्ष जो हैं, उनमें विवाद हैं. ऐसे में दुआ यही है कि जंग न हो. 14 दिन है, अगर इसमें कोई समझौता नहीं हो सकता, तो कम से कम वार्ता को आगे ले जाया जाए. बातचीत का नतीजा कैसे निकलेगा, फिलहाल इसपर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. ऐसे में पाकिस्तान की भूमिका इस वार्ता को सकारात्मक दिशा में आगे ले जाना है. 

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