अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेजी से बढ़ता दिख रहा है. पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी काफी बढ़ा दी है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह 2003 में इराक पर हमले के बाद का सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा हो सकता है. हालांकि यह भी संभव है कि यह सैन्य तैयारी केवल दबाव की रणनीति हो, ताकि ईरान को किसी समझौते के लिए मजबूर किया जा सके. अमेरिका के खाड़ी क्षेत्र के सहयोगी देश भी संभावित हमले के अनिश्चित परिणामों को लेकर चिंतित हैं.
अगर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फेल हो जाती है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हमला करने का फैसला लेते हैं तो इसके कई बड़े नतीजे हो सकते हैं. आइए 7 संभावित स्थितियों से समझते हैं.
1. परमाणु ठिकानों पर हमले कर सकता है अमेरिका
अमेरिका ईरान के IRGC, बसीज बल, मिसाइल ठिकानों और परमाणु केंद्रों पर सटीक हवाई और नौसैनिक हमले कर सकता है. अगर इससे सरकार कमजोर पड़ती है और बदलाव होता है तो यह सकारात्मक दिख सकता है. लेकिन इराक और लीबिया के उदाहरण बताते हैं कि तानाशाही के बाद स्थिर लोकतंत्र लाना आसान नहीं होता. कई बार अराजकता बढ़ जाती है.
2. सरकार बनी रहे, लेकिन नीतियों में नरमी
संभव है कि हमलों के बाद भी ईरान की मौजूदा सरकार बनी रहे, लेकिन वह अपनी नीतियों में कुछ बदलाव करें, जो जनता के हित में हो. जैसे क्षेत्रीय मिलिशिया को समर्थन कम करना या परमाणु कार्यक्रम सीमित करना. हालांकि पिछले दशकों में ईरानी नेतृत्व ने कम लचीलापन दिखाया है.
3. ईरान में लग सकता है मिलिट्री शासन
अगर ईरान की मौजूदा सरकार अमेरिका के हमले की वजह से गिरती है तो IRGC जैसे शक्तिशाली समूह अपना रूल चला सकते हैं. इससे लोकतंत्र नहीं बल्कि कठोर सैन्य शासन बन जाएगा. इससे आम लोगों को आजादी नहीं बल्कि और सख्त नियम और कानूनोंं का सामना करना पड़ सकता है.
4. सीधी जवाबी कार्रवाई
ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि वह हमले का जवाब देगा. उसके पास बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन हैं. वह खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों या इजरायल जैसे देशों को निशाना बना सकता है.
5. होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव
ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा डाल सकता है. यहां से दुनिया के करीब 20-25% तेल की आपूर्ति होती है. रुकावट से तेल की कीमतें बढ़ेंगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी.
6. अमेरिकी युद्धपोत पर हमला
ईरान स्वॉर्म अटैक जैसी रणनीति से अमेरिकी जहाजों को निशाना बना सकता है. ऐसा होने पर संघर्ष और बढ़ सकता है.
7. व्यापक अराजकता
अमेरिका के एक्शन से अगर ईरान की मौजूदा सरकार गिरती है तो गृहयुद्ध और जातीय संघर्ष भड़क सकते हैं. इससे शरणार्थी संकट और मानवीय समस्या पैदा हो सकती है, जिसका असर पूरे मध्य पूर्व पर पड़ेगा.