अमेरिका-इजरायल के ईरान से युद्ध के बीच अमेरिका के सबसे ताकतवर एयरक्राफ्ट कैरियर USS जेराल्ड आर फोर्ड को लेकर बुरी खबर आई है. 12 मार्च को जहाज में लगी आग 30 घंटे से ज्यादा समय तक जलती दिखी. हालात इतने बदतर हो गए कि 600 से ज्यादा अमेरिकी सैनिकों को फर्श पर सोना पड़ा. वॉरशिप को अब रिपेयरिंग के लिए ग्रीस भेजा जा रहा है.
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वॉरशिप के लॉन्ड्री एरिया में आग लगी थी, लेकिन धीरे-धीरे यह अंदरूनी हिस्सों में भी फैल गई. जहाज जैसे हाई-टेक वॉर मशीन में इतनी लंबी आग का काबू में न आना अमेरिका की सैन्य तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर रहा है. कईं लोग ये भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या महीनों से घर न जा पाने वाले नाविकों ने ही आग लगा दी. युद्ध के बीच इस घटना को देखकर चीन खुश हो रहा है.
चीनी सैन्य विशेषज्ञ का बयान
चीन के सैन्य विशेषज्ञ वांग यूनफेई ने ग्लोबल टाइम्स से बातचीत में कहा कि हाईटेक वॉरशिप में जटिल इलेक्ट्रिकल सिस्टम और तेल की लाइनें होती हैं, जिससे आग लगने पर वह तेजी से फैलती है, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि अगर आग को जल्दी काबू में नहीं किया जा सका तो यह संकेत है कि या तो ऑटोमैटिक फायर सिस्टम ठीक से काम नहीं कर पाया या फिर प्रतिक्रिया में देरी हुई.
उन्होंने यह भी कहा कि इतने बड़े लेवल के जंगी जहाजों में अलग-अलग हिस्सों को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि आग फैल न सके, लेकिन अगर सैंकड़ों सैनिकों को अपनी रहने की जगह छोड़नी पड़े तो इसका मतलब है कि फायर कंट्रोल डिजाइन और मैनेजमेंट दोनों में कमी रही. वांग यूनफेई ने बताया कि फायर अलार्म बजते ही क्रू को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए थी. अगर इसमें देरी हुई तो यह ट्रेनिंग में कमजोरी को भी दिखाता है.
जहाज में किसने लगाई आग?
अमेरिका के USS जेराल्ड फोर्ड पर ऐसे समय में आग लगी, जब यह कैरियर 10 महीने से तैनात है. आमतौर पर एयरक्राफ्ट कैरियर 6 महीने की तैनाती पर रहते हैं. वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक इतनी लंबी तैनाती से सैनिकों में थकान बढ़ती है, जिससे इमरजेंसी में प्रतिक्रिया धीमी पड़ सकती है.
सोशल मीडिया पर इस तरह की अटकलें लग रही हैं कि क्या क्रू मेंबर्स ने खुद ही आग लगा दी, ताकि उनके जहाज को रिपेयर के नाम पर वापस अमेरिका भेज दिया जाए, हालांकि इसकी पुष्टि होना बाकी है. अमेरिकी नेवी ने कहा है कि इस घटना की जांच की जा रही है. यह आग कोई पहली समस्या नहीं है. इससे पहले फरवरी में इसी जहाज पर 650 टॉयलेट बंद होने जैसी तकनीकी गड़बड़ी भी सामने आ चुकी है.
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