Who Is Sergio Gor: कौन हैं सर्जियो गोर, जिनकी अमेरिकी सीनेट ने भारत में अगले राजदूत के रूप में नियुक्ति की, ट्रंप से कैसा है रिश्ता



अमेरिकी सीनेट ने सर्जियो गोर को भारत में अमेरिका के अगले राजदूत के रूप में नियुक्त किया है. डोनाल्ड ट्रंप के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक गोर अब नई दिल्ली में वॉशिंगटन की कूटनीति का नया चेहरा बन गए हैं. 38 वर्षीय सर्जियो गोर उन 107 नामांकित व्यक्तियों में शामिल थे, जिन्हें अमेरिकी सीनेट ने सामूहिक मतदान में मंजूरी दी थी, जिसमें 51 सीनेटरों ने पक्ष में और 47 ने विपक्ष में मतदान किया था.

डोनाल्ड ट्रंप का गोर को लेकर बयान
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सर्जियो गोर को अपना ग्रेट फ्रेंड बताते हुए कहा था कि दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले क्षेत्र के लिए यह महत्वपूर्ण है कि मेरे पास कोई ऐसा व्यक्ति हो, जिसपर मैं अपने एजेंडे को पूरा करने और अमेरिका को फिर से महान बनाने में हमारी मदद करने के लिए पूरी तरह से भरोसा कर सकूं. ट्रंप ने कहा कि सर्जियो एक अविश्वसनीय राजदूत बनेंगे.

कौन हैं सर्जियो गोर
सर्जियो गोर लंबे समय से रिपब्लिकन रणनीतिकार, फंडरेजर और डोनाल्ड ट्रंप के करीबी राजनीतिक सहयोगी रहे हैं. अगस्त में डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें भारत में अमेरिकी राजदूत और दक्षिण एवं मध्य एशियाई मामलों के लिए विशेष दूत के रूप में नामित किया था. अपने नामांकन से पहले सर्जियो गोर ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन में राष्ट्रपति कार्मिक के निदेशक के रूप में कार्य किया है और अमेरिकी राष्ट्रपति के अभियान और ट्रांजिशन टीमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

सीनेट की विदेश संबंधी समिति के समक्ष सर्जियो गोर ने भारत को एक रणनीतिक साझेदार बताया. गोर ने नई दिल्ली के साथ रक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी संबंधों को गहरा करने का संकल्प लिया और कहा कि यह संबंध 21वीं सदी को परिभाषित करेगा.

भारत को कैसे देखते हैं सर्जियो गोर
सर्जियो गोर ने सांसदों को बताया कि अमेरिका-भारत व्यापार संबंधों में सुधार से न केवल अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी, बल्कि अन्य देशों पर चीन का आर्थिक प्रभाव भी कम होगा. उन्होंने दक्षिण एशिया में स्थिरता बनाए रखने में भारत की बढ़ती भूमिका पर भी प्रकाश डाला और कहा कि स्थिर दक्षिण एशिया अमेरिका और सभी देशों के हित में है. क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने में भारत की भूमिका को कम करके नहीं आंका जा सकता.

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