‘अगर टैरिफ रद्द हुआ तो US को भरने पड़ेंगे अरबों रुपये’, अमेरिकी कोर्ट में ट्रंप प्रशासन ने दी और क्या दलील?


अमेरिका की एक संघीय अपील अदालत ने शुक्रवार (29 अगस्त, 2025) को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दुनिया के कई देशों पर लगाए गए टैरिफ पर अपना फैसला सुनाया. कोर्ट के इस फैसले से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ के फैसले को बड़ा झटका लगा है. अमेरिकी अपील कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को अवैध करार दिया. कोर्ट ने कहा कि ट्रंप को हर देश पर व्यापक रूप से टैरिफ लगाने का कोई कानूनी अधिकार हासिल नहीं था. हालांकि, कोर्ट ने इन टैरिफ को फिलहाल लागू रहने दिया है, ताकि ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का समय मिल सके.  

अमेरिका के संघीय सर्किट के अपील कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने आपातकालीन शक्तियों के कानून के तहत अपने अधिकारों को दायरे का पार कर दिया था. यह फैसला ट्रंप के लिए एक बड़ी कानूनी हार है, जो न्यूयॉर्क के एक स्पेशल फेडरल ट्रेड कोर्ट के मई महीने में दिए फैसले को पुष्टि करता है.

कोर्ट ने किन देशों पर लगाए टैरिफ पर सुनाया फैसला?

अमेरिकी अदालत ने उन टैरिफ को फैसला सुनाया है, जो डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रैल महीने में सभी साझेदार देशों पर लगाए थे. इसमें उन टैरिफ को शामिल किया गया जो अमेरिकी राष्ट्रपति ने पहले चीन, मैक्सिको और कनाडा पर लागू किए थे. ट्रंप ने 2 अप्रैल को आजादी के दिन घोषित करते हुए दुनिया के कई देशों पर रेसीप्रोकल टैरिफ लागू किया था. ट्रंप ने तर्क दिया था कि कई साझेदार देशों से अमेरिका को व्यापारिक घाटा हो रहा है. ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरमेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट का हवाला देते हुए लागू किए गए इन टैरिफों को सही ठहराया.

कोर्ट ने 7-4 के बहुमत से सुनाया फैसला

संघीय अपील कोर्ट ने शुक्रवार (29 अगस्त) को 7-4 के बहुमत से फैसला सुनाया है. कोर्ट ने फैसले में लिखा कि यह कहीं से संभव नहीं लगता कि कांग्रेस की मनसा राष्ट्रपति को असीमित अधिकार देने का था, जिससे वह दुनिया के किसी भी देश पर मनमाने ढ़ंग से टैरिफ लगा सकें.

ट्रंप प्रशासन कोर्ट में क्या दी दलीलें?

सरकार ने कोर्ट में दलील दी कि अगर ट्रंप के टैरिफ को रद्द किया जाता है, तो उसे इंपोर्ट टैक्स से वसूल किए गए कुछ पैसों को वापस करना पड़ सकता है, इससे अमेरिका के खजाने को एक बड़ा आर्थिक झटका लग सकता है और अगर ऐसा होता है तो आगे चलकर यह ट्रंप की टैरिफ लगाने की कोशिशों को भी कमजोर कर सकता है.

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