‘अब होर्मुज को लेकर धमकी नहीं दे पाएगा ईरान’, ऐसा क्या करने जा रहे ट्रंप जिससे खत्म होगी भारत की टेंशन?


इजरायल और ईरान की बीच जब से जंग शुरू हुई है, तब से एशियाई, मिडिल ईस्ट और कुछ पश्चिमी देश बेहद टेंशन में हैं. जंग शुरू होते ही ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने की घोषणी की थी, जिसकी वजह से उधर तेल और गैस का निर्यात करने वाले मिडिल ईस्ट देश तो उधर, तेल और गैस का आयात करने वाले एशियाई और पश्चिमी देश टेंशन में आ गए. इस बीच अमेरिका की तरफ से बेहद राहत देने वाली खबर आई है.

व्हाइट हाउस ने कहा है कि अगर जरूरी हुआ तो संयुक्त राज्य अमेरिका होर्मुज जलडमरू मध्य (Strair of Hourmuz) से गुजरने वाले तेल टैंकरों के लिए नौसैनिक सुरक्षा दल तैनात कर सकता है. ईरान के साथ संघर्ष ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री गलियारों में से एक में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और शिपिंग सुरक्षा के बारे में चिंताएं बढ़ा दी हैं. होर्मुज के रास्ते 1.5 से 2 करोड़ बैरल कच्चे तेल और गैस का निर्यात होता है.

व्हाइट हाउस में ब्रीफिंग के दौरान प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि ईरान के खिलाफ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी जारी रहने के कारण अमेरिका तेल बाजारों और समुद्री यातायात पर कड़ी नजर रख रहा है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने और जहाजों की सुरक्षा के लिए पहले ही कदम उठा लिए हैं. यूएस डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन खाड़ी क्षेत्र में और उसके आसपास चलने वाले कच्चे तेलवाहक और मालवाहक जहाजों के लिए राजनीतिक जोखिम बीमा प्रदान करेगा.

उन्होंने कहा कि जहाजों की सुरक्षा बिगड़ने की स्थिति में अमेरिकी नौसेना सीधे हस्तक्षेप भी कर सकती है. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अगर जरूरी हुआ तो अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य से टैंकरों को एस्कॉर्ट करना शुरू कर देगी. इस कदम का मकसद ईरान के साथ संघर्ष तेज होने के कारण वैश्विक तेल प्रवाह में व्यवधान को रोकना है. यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा बाजारों में केंद्रीय भूमिका निभाता है.

होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व की वैश्विक तेल आपूर्ति के 20 प्रतिशत को नियंत्रित करता है. व्हाइट हाउस ने कहा कि प्रशासन संघर्ष के आर्थिक प्रभाव को कम करने के लिए अपनी आर्थिक और ऊर्जा टीमों के साथ मिलकर काम कर रहा है. लीविट ने कहा, ‘तेल की कीमतों और घरेलू अर्थव्यवस्था के संबंध में, निश्चित रूप से, यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट, ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और डग बर्गम के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय आर्थिक ऊर्जा परिषद ने काफी पहले से काम किया है.’

अमेरिकी अधिकारियों का मानना ​​है कि अर्थव्यवस्था संघर्ष से उत्पन्न होने वाले अस्थाई झटकों को सहन कर सकती है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और उनकी आर्थिक टीम का मानना ​​है कि अर्थव्यवस्था बहुत मजबूत बनी हुई है. यह सुदृढ़ है और ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के किसी भी अस्थाई प्रभाव का सामना करने में सक्षम होगी.

व्हाइट हाउस ने कहा कि ईरान के खिलाफ हालिया कार्रवाई से अंततः वैश्विक ऊर्जा बाजारों की स्थिरता में सुधार हो सकता है. लीविट ने तर्क दिया कि इस संघर्ष से रणनीतिक जलमार्ग से होकर गुजरने वाले जहाजों पर तेहरान का प्रभाव कम हो जाएगा. उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि इससे यह स्पष्ट होता है कि यह कार्रवाई इतनी आवश्यक क्यों थी, क्योंकि अंततः ऊर्जा उद्योग को ईरान के संबंध में राष्ट्रपति की कार्रवाई से लाभ होगा.’

ईरान अब इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाले जहाजों को धमकी नहीं दे पाएगा. उन्होंने कहा, ‘ईरान अब होर्मुज जलडमरूमध्य को नियंत्रित नहीं कर पाएगा और ऊर्जा के मुक्त प्रवाह को प्रतिबंधित नहीं कर पाएगा.’ संघर्ष शुरू होने के बाद तेल की कीमतों में थोड़ी वृद्धि हुई, जिससे प्रमुख आयातक देशों में मुद्रास्फीति और ईंधन की लागत को लेकर चिंताएं बढ़ गईं.



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